कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)
Karma Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)
by स्वामी विवेकानन्द / पं. बदरीदत्त शर्मा
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पहला अध्याय ७
विचार का फल और मानसिक शक्ति का चमत्कार है। यन्त्र या औज़ार, नगर या जहाज़ ये सब मनुष्य की विचार-शक्ति से उत्पन्न हुए हैं। यह विचार-शक्ति चारित्र्य से बनती है और चरित्र का उत्पादक कर्म है। जैसा कर्म होगा, वैसा ही चरित्र बनेगा और जैसा चरित्र बनेगा, वैसी ही मानसिक शक्ति उत्पन्न होगी। संसार में बलवान् और प्रभावशाली वे लोग हुए हैं, जो बड़े बड़े काम करनेवाले थे। इनकी मानसिक शक्ति भी विचित्र थी, जिससे आन की आन में संसार की काया पलट गई। यह मानसिक शक्ति इनमें लगातार काम करने से पैदा हुई थी। क्या बुद्धदेव आदि जैसे व्यक्तियों की मानसिक शक्ति एक जन्म के कर्म का फल थी? नहीं। संसार को मालूम है कि बुद्ध का बाप किस प्रकार का मनुष्य था। कोई नहीं बतला सकता कि उसने अपने जीवन में कोई काम भी मनुष्य की भलाई के लिए किया हो। बुद्ध ※ के पिता एक छोटे से मण्डल के अधीश्वर थे, उनके जैसे मण्डलेश लाखों इस पृथ्वी पर हो चुके हैं। यदि यह कहा जावे कि मनुष्य में मानसिक शक्ति माता-पिता के अंश से आती है तो आप कैसे स्वीकार करेंगे कि बुद्ध के जैसी प्रबल मानसिक शक्ति एक साधारण राजा के अंश से परिणत हुई थी। सम्भव है कि उसके सेवक और चाकर ही उसकी आज्ञा का पालन न करते हों। परन्तु यहाँ देखिए उसके पुत्र का प्रताप और गौरव विलक्षण है। आधा संसार अब तक उसके नाम की उपासना कर रहा है। बुद्ध में यह प्रबल मान-
※ बुद्ध के पिता का नाम शुद्धोदन था, जो कपिलवस्तु का एक माण्डलिक राजा था। उसकी रानी अर्थात् बुद्ध की माता का नाम माया देवी था।
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