कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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Read in context३२५ ] [ कल्कि पुराण
यज्ञविज्ञौ सर्वलोकपूजितौ विजितेन्द्रियौ ।३४।
सुमन्त्रकस्तु मालिन्या जनयामास शासनम् ।
वेगवन्तञ्च साधूना द्वावेतावुपकारको ।।३५।।
शम्बल ग्राम नामक वह नगरी ध्वजा-पताका से युक्त उन्नत
प्रासादो वाली, मयूर, हंसादि से सुशोभिता, सुगन्ध-धूम-वसना कोकिल
के समान मधुरालाप युक्ता तथा कामिनी के समान सर्व प्रकार सजी हुई
थी। वह कल्किजी को पति रूप मे प्राप्त कर अत्यन्त शोभामयी हो गई
।३०-३१। वे अजन्मा, सर्वाश्रय रूप एव कलि-विनाशक कल्किजी अनेक
वर्ष तक शम्भल मे रह कर पद्मा के साथ बिहार करते रहे ।३२। तद-
नन्तर कवि की पत्नी कामकला ने दो पुत्र उत्पन्न किये जिनके नाम
बृहत्कीर्ति और बृहद्बाहु हुए । यह दोनो अत्यन्त बली और पराक्रमी थे
।३३। प्राज्ञ की भार्या सुमति ने जितेन्द्रिय और सर्वलोक पूजित यज्ञ और
विज्ञ नामक दो पुत्र उत्पन्न किये ।३४। सुमन्त्र की पत्नी मालिनी ने
शासन और वेगवान् नामक दो पुत्रो को जन्म दिया । यह दोनो साधुजनो
का उपकार करने वाले हुए ।३५।
तद्द्वैतः कल्किश्च पद्मायां जयो विजय एव च ।
द्वौ पुत्रौ जनयामास लोकख्यातौ महाबलौ ।।३६।।
एतै परिवृतोऽमात्यै सर्वसम्पन्समान्वितौ ।
वाजिमेधविधानार्थ मुद्यत पितर प्रभु ।३७।
समीक्ष्य कल्कि प्रोवाच पितामहन्निवेश्वरर. ।
दिशा पालान्विजित्याह घनान्याहृत इत्युत ।३८।
कारयिष्याम्याश्वमेध यामि दिग्विजयोय भो ! ।३६।
इति प्रणम्य त प्रीत्या कल्कि पटपुरञ्जयः ।
सेनागणैः परिवृतः प्रययौ कोकट पुरम् ।४०।
कल्किजी की पत्नी पद्मा ने जय, विजय नामक दो पुत्र प्रसव
किये । यह दोनो महाबली तीनो लोको में प्रसिद्ध हुए ।३६। इस प्रकार
उनका परिवार पुत्रवान् और सर्व ऐश्वर्य सम्पन्न हो गया । फिर कल्कि