कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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षण्डत्वादात्मनो जन्म कर्म चात्र शिवस्तवः।
मृते पितरि तद्विष्णोः क्षेत्रे माया प्रदर्शनम् ।१३।
आख्यानमन्तस्तस्य ज्ञानवैराग्यवैभवम् ।
राज्ञा प्रयाण क केश्च पद्माया सह शम्भले ।१४।
विश्वकर्मविधानञ्च वसति पद्माया सह ।
ज्ञातिभ्रातृसुहृत्पुत्रै सेनाभिर्बौद्धनिग्रह ।१५।
तदनन्तर विवाह के उद्देश्य से कल्किजी का गमन, जल क्रीडा
के प्रस ग द्वारा कल्किजी और पद्मा का पारस्परिक परिचय और इनके
विवाह का प्रस ग कहा गया है ।११। फिर स्त्रीत्व को प्राप्त हुए राजा-
गण का कल्कि-दर्शन से पुन. पुरुषत्व की प्राप्ति, अनन्त मुनि का सभा मे
आगमन और राजाओ से सम्वाद की कथा का वर्णन है ।१२। षण्ड
रूप से अनन्त मुनि के जन्म का वर्णन, शिवजी की स्तुति और अनन्त
मुनि के पिता के परलोक-गमन के पश्चात् विष्णु क्षेत्र मे भगवती माया
के दर्शन का प्रस ग कहा गया है ।१३। तदनन्तर अनन्त का आख्यान,
ज्ञान एंव वैराग्य रूप एश्वर्य का प्रस ग, फिर राजाओ का प्रयाण और
पद्मा सहित कल्किजी के शम्बल-गमन की कथा कही है ।१४। फिर
विश्वकर्मा द्वारा शम्बलपुरी का निर्माण और उसमे पद्मा, जाति-बांधव,
भ्रात गण, सुहृद्जन, पुत्रादि तथा सेना के सहित कल्किजी का निवास
और बौद्धो के निग्रह की कथा वर्णन की गई है ।१५।
- कथितश्चात्र तेषाञ्च स्त्रीणां सयोधनाश्रयः ।
नतऽत्रो बालखिलीना मुनीना रवानिवेदनम् ।१६।
सपुत्राया. कुथोदर्या वधश्चात्र प्रकीर्त्ततः ।
हरिद्वारगतस्यापि कल्केर्मु निसमागम ।१७।
सूर्य्यवंशस्य कथेन सोमस्य च विधानत. ।
श्रीरामचरित चारुसूर्य्यवंशानुवर्णने ।१८।
देवापेरच मरो सद्यो युद्धयात्र प्रकीर्तित. ।