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कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

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DevanagariHindipublished259 pages

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Page 256

एकविश अध्याय-३ ] [ ५४१
महाघोरवनेकोक विकोकविनिपातनम् ।१६।
भल्लाटगमन तत्र शय्याकरणादिभि सह ।
युद्ध शशिध्वजेनालु सुशान्ता भक्तिकीर्तनम् ।२०।
तदुपरान्त बौद्धो की नारियो का रणक्षेत्र मे युद्ध के उद्देश्य से
श्रागमन, बालखिल्य मुनियो का श्रागमन और अपने वृत्तान्त का वर्णन
।१३। फिर कुथोदरी नाम की राक्षसी का अपने पुत्र के सहित मारा
जाना तथा हरिद्वार मे कल्किजी से मुनियो का मिलना कहा गया है
।१७। फिर सूर्यवंश और चन्द्रवंश का वर्णन तथा सूर्यवंश के प्रस ग
में भगवान् श्री राम का चरित्र-वर्णन हुआ है ।१८। फिर मरु और
देवापि का युद्ध के लिए आगमन, अत्यन्त विकराल कोक-विकोक का
वध, कल्किजी की भल्लाट नगर-यात्रा, शय्याकरण आदि से युद्ध,
शशिध्वज-कल्किजी का स ग्राम और सुशांता द्वारा भक्ति एव कीर्तन
की कथा कही गई है ।१६-२०।
युद्धे कल्केरानयन धर्मस्य च कृतस्य च ।
सुशान्तायाः स्तवस्तत्र रमोद्वाहस्तु कल्किना ।२१।
सभाया पूर्वकथन निजगृहत्वकारणम् ।
मोक्ष शशिध्वजस्यात्र भक्तिप्रार्थयितुर्विभो ।२२।
विषकन्यामोचनञ्च नृपाणामभिषेचनम् ।
मायास्तव, शम्भलेषु नानायज्ञादि साधनम् ।
नारदाद्विष्णुयशसो मोक्षश्चात्र प्रकीर्तितः ।
कृतधर्म प्रवृत्तिश्च रुक्मिणी व्रतकथनम् ।२४।
ततो विहारः कल्केश्च पुत्रपौत्रादि सम्भवः ।
कथितो देवगन्धर्वगणागमनमत्रहि ।२५।
फिर युद्ध क्षेत्र से कल्किजी, धर्म और सत्युग का शशिध्वज
द्वारा अपने घर लाना, रानी सुशान्ता द्वारा कल्किजी का स्तव और
कल्कि-रमा विवाह का प्रस ग कहा गया है ।२१। फिर राजा शशिध्वज