कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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का सञ्चार कब होगा ? मेरे द्वारा किये हुए पाप कब नष्ट होगे ? कब
मैं शान्त चित्त से पृथिवी पर विचरण करता हुआ आदर को प्राप्त हूँगा ?
। १२। इस ऋषि प्रोक्त गंगा-स्तव का इस प्रकार पाठ किया गया । इसके
पढने और सुनने से यश-लाभ होता तथा आयु की वृद्धि होती है । १३।
इस स्तोत्र का प्रातः मध्याह्न और साय—तीनो काल पाठ करने से गंगा
जी का सान्निध्य प्राप्त होकर सब पापो का क्षय तथा बल और आयु की
वृद्धि होती है । १४। इस भार्गवाख्यान का मैने शुकदेवजी से श्रवण किया
था । यह पढन और सुनने से पुण्यप्रद तथा धन और यश के बढाने
वाला है ।१५। भगवान् कल्कि के अवतार विषयक अद्भुत उपाख्यान का
भक्ति सहित पाठ अथवा श्रवण करने पर सब प्रकार के अमगलो का
का नाश हो जाता है ।१६।