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कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariHindipublished259 pages

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Page 116

३६६ ] कल्कि पुराण
विष्णु नृसिंह रूप हुए थे, उस समय हम जैसे उन पर आघात करने मे
समर्थ नही हो सके थे, वैसे ही इन कल्किजी और उनके सेवको पर भी
आघात करने मे पूर्णतया असमर्थ हैं।३२। अस्त्रो के यह वचन सुनकर
स्त्रिया अत्यन्त विस्मित हुईं और तब वे स्नेह और मोह से युक्त होकर
कल्किजी की शरण मे पहुँची । ३३। भगवान कल्कि म्लेच्छ-नारियो को
ज्ञाननिष्ठा मे स्थित देखकर उनके प्रति पापो का नाश करने वाला भक्ति-
योग हँसते हुए कहने लगे । ३४।
कर्मयोगञ्चात्मनिष्ठं ज्ञानयोगं भिदाश्रयम् ।
नैष्कर्म्यलक्षणं तासा कथयामास माधवः ३५।
ताः स्त्रियः कल्कि गदित ज्ञानेन विजितेन्द्रियाः ।
भक्त्या परमवापुस्तद्योगिना दुर्लभं पदम् । ३६।
दत्वा मोक्ष म्लेच्छबौद्धपियारण कृत्वा युद्ध
भैरव भीमकर्मा । हत्वा बौद्धान् म्लेच्छ सघाश्च
कल्किस्तेषा ज्योति स्थानापूर्ण रेजे । ३७।
येशृण्वन्ति वदन्ति बौद्धनिधन म्लेच्छक्षय सादराल्लोकाः
शोकहर सदा शुभकर भक्तिप्रदं माधवे ।
तेषामेव पुनर्न जन्ममरण सर्वार्थसम्पत्कर
माया मोहविनाशन प्रतिदिन ससारतापच्छिदम् ।३८।
तदनन्तर उन्होने उन नारियो को कर्मयोग, आत्मनिष्ठात्मक ज्ञान-
योग, भेदाश्रय, निष्कर्मत्व के लक्षण आदि का प्रसग सुनाया ।३५। इस
प्रकार जब वे म्लेच्छ रमणियां कल्कि-प्रदत्त ज्ञानोपदेश से सचेत होकर
इन्द्रियो का दमन करके, भक्ति करती हुई, योगियो को भी दुर्लभ मोक्ष
पद को प्राप्त हो गई ।३६। इस प्रकार उन भीमकर्मा कल्किजी घोर युद्धमे
बौद्ध और म्लेच्छो का सहार कर दिया, और उनकी स्त्रियो को मोक्षपद
प्रदान करके मरे हुए म्लेच्छो और बौद्धो को ज्योतिर्मय स्थान में स्थित
कर विराजमान हुए । ३७। जो इस बौद्धो के निधन एव म्लेच्छो के क्षीण
होने की कथा को सुनेगे, वे सभी शोको से मुक्त होकर कल्याण को
प्राप्त होगे । भगवान के प्रति उनके हृदय मे भक्ति का संचार होगा और
वे जन्म- मरण के चक्र से छूट जाँयगे । इस कथा के सुनने से सर्व ऐश्वर्य
की प्राप्ति होती है और माया-मोह का विनाश होता है, तथा संसार के
ताप का सदा उच्छेद करने मे समर्थ होता है ।३८। —❀—