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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 9 of 442

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Page 9

१० ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে হে
हे ब्राह्मण ! जो ब्रह्माजी ने कहा था वह रहस्य के सहित धर्मशास्त्र
आपसे सब ओर से अध्ययन करके हम सब कृतकृत्य अर्थात् सफल
हो गए हैं। अब हम लोग पुनः यह श्रवण करने की इच्छा करते हैं कि
पुराने समय में काली देवी ने हरि प्रभु का जो परमयति और ईश्वर थे,
उन्हें किस प्रकार से सती के स्वरूप से मोहित कर दिया था। जो
भगवान् हरि सदा ही ध्यान में मग्न रहा करते थे, यम वाले और यतियों
में परम श्रेष्ठ थे तथा संसार से पूर्णतया विमुख रहा करते थे, उनको
संक्षोभित कर दिया था अथवा प्रजापति दक्ष की पत्नियों में परम
शोभना सती किस रीति से समुत्पन्न थीं तथा पत्नी के पाणिग्रहण करने
में भगवान शम्भु ने कैसे अपना मन बना लिया था ? प्राचीन समय में
किस कारण से तथा किस रीति से दक्ष प्रजापति के कोप से सती ने
अपनी देह का त्याग किया था अथवा फिर वही सती गिरिवर हिमवान्
की पुत्री के रूप में कैसे समुत्पन्न हुईं ? फिर उस देवी ने भगवान्
कामदेव के शत्रु श्री शिव का आधा शरीर कैसे आहत कर लिया था ?
हे द्विजश्रेष्ठ! यह सभी कथा आप हमारे समक्ष विस्तार के साथ वर्णित
कीजिए । हे विप्रेन्द्र ! हम यह जानते हैं कि आपके समान अन्य कोई
भी संशयों का छेदन करने वाला नहीं है और भविष्य में भी न होगा
सो अब आप यह समस्त वृतान्त बताने की कृपा कीजिए ।
मार्कण्डेय जी कहा-आप समस्त मुनिगण अब श्रवण वह करिये
जो कि मेरा गोपनीय से भी अधिक गोपनीय है तथा परम पुण्य-शुभ
करने वाला, अच्छा ज्ञान प्रदान करने वाला तथा परम कामनाओं को
पूर्ण करने वाला है। इसे प्राचीन समय में ब्रह्माजी ने महान् आत्मा वाले
नारद जी से कहा था। इसके पश्चात् नारद जी ने भी बालखिल्यों के
लिए बताया था। उन महात्मा बालखिल्यों ने यवक्रीत मुनि से कहा था
और यवक्रीत मुनि ने असित नामक मुनि को यही बताया था। हे
द्विजगणों ! उन असित मुनि ने विस्तारपूर्वक मुझको बताया था और मैं
अब पुरातन कथा को आप सब लोगों को श्रवण कराऊँगा । इसके पूर्व
मैं इस जगत् के प्रति परमात्मा चक्रपाणि प्रभु को प्रणिपात करता हूँ।