कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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ॐ
॥ कालिकायै विद्महे श्मशानवासिन्यै धीमहि तन्नो घोरे प्रचोदयात् ॥
श्रीकालिका पुराण
कालिका अवतरण वर्णन
पूर्ण रूप से एक ही निष्ठा में रहने वाले हृदय से समन्वित योगियों
के द्वारा सांसारिक भय और पीड़ा के विनाश करने के अनेकों उपाय
किए गये हैं। ऐसे भगवान् हरि के दोनों चरण कमल सर्वदा आप
सबकी रक्षा करें जो समस्त योगीजनो के चित्त में अविद्या के अन्धकार
को दूर हटाने के लिए सूर्य के समान हैं तथा यतिगणों की मुक्ति का
कारण स्वरूप हैं। विभु के जन्म में शुद्धि-कुबुद्धि के हनन करने वाली
है और इन जन्तुओं के समुदाय को विमोहित कर देने वाली है; वह
माया आपकी रक्षा करे। समस्त जगती के आदिकाल में विराजमान
पुरुषोत्तम ईश्वर को (जो नित्य ही ज्ञान से परिपूर्ण हैं उनको) प्रणाम
करके मैं कालिका पुराण का कथन करूँगा।
हिमालय के समीप में विराजमान मुनियों ने परमाधिक श्रेष्ठ
मार्कण्डेय मुनि के चरणों में प्रणिपात करके उनसे कर्मठ प्रभृति
मुनिगण ने पूछा था कि हे भगवान् ! आपने तात्विक रूप से समस्त
शास्त्रों और अंगों के सहित सभी वेदों को सब भली-भाँति मन्थन
करके जो कुछ भी साररूप था वह सभी भाँति से वर्णन कर दिया है।
हे ब्रह्मन् ! समस्त वेदों में और सभी शास्त्रों में जो-जो हमको संशय
हुआ था वही आपने ज्ञानसूर्य के द्वारा अन्धकार के ही समान विनिष्ट
कर दिया है। हे द्विजों में सर्वश्रेष्ठ ! आपके प्रसाद अर्थात् अनुग्रह से हम
सब प्रकार से वेदों और शास्त्रों में संशय से रहित हो गये हैं अर्थात् अब
हमको किसी में कुछ भी संशय नहीं रहा है।