कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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और मोद से कुब्जों के समुदाय से समावृत होने वाले और जहाँ पर
और सदा ही वसन्त का प्रभाव विद्यमान रहता है क्या वहाँ आप गमन
करना चाहती हैं ? समस्त कामनाओं के प्रदान करने वाले वृक्षों से और
कल्पसंज्ञा वाले शार्दूलों से जो संच्छन्न है वहाँ पर जिसके कुसुमों का
उपयोग करोगी ।
हे महाभागो! जहाँ परश्वापद् गण परम प्रशान्त हैं जो मुनि और
यतियों से सेवित हैं अनेक प्रकार के मृग गणों से समावृत हैं ऐसा देवों
का आलय है । स्फटिक के वर्ण से युक्त विप्र आदि से और रजत
चाँदी के निर्मित से विराजित हैं जो मानस सरोवर के वर्गों से दोनों
ओर परिशोभा वाला है । जो हिरण्मय रत्नों के नाल वाले पंकजों तथा
मुकुलों से आवृत्त हैं तथा शिशुमार, शंख, कच्छप, मकर, झपों के
द्वारा निमेषित और मञ्जुल नीलोत्पल आदि से समन्वित है । देवी के
सैकड़ों स्नानों से सक्त सम्पूर्ण वाले कुंकुमों से युक्त, विचित्र मालाओं
के गन्ध से युक्त, जनों से अपूर्ण एवं स्वच्छ कान्ति वाले शाद्वलों से,
तरुओं से जो तीर पर स्थित थे उनसे उपशोभित, मानों नृत्य करते हुए
शास्त्रों के समुदाय से अपने सम्भव का व्यञ्जन करते हुए कादम्ब,
सारस, मत्त चक्रांगों के ग्राम (समुदाय) से शोभित मधुर ध्वनि करने
वाले, मोद को करने वाले भ्रमर आदि से युक्त-इन्द्र, यम, कुबेर,
वरुण की पुरियों से शोभान्वित देवों का आलय मेरु को जो उन्नत है
जो रम्भा, शची, मेनका आदि रम्भोरुगण सेवित है । क्या आप सबके
सारभूत महागिरि की इच्छा करती हैं ?
वहाँ पर सैकड़ों देवियों से समन्वित अप्सरागणों के सहित सेवा
की हुई शची (इन्द्राणी) आपके लिए समुचित सहायता करेगी । मेरे
कैलास अंचलों के शिरोमणि को जो सत्पुरुषों का आश्रय और वित्तेश
कुबेर की पुरी से परिराजित हैं क्या ऐसे स्थान के प्राप्त करने की इच्छा
करती हो ? हे सुन्दरि ! गंगाजल से ओघ से प्रयत, पूर्ण चन्द्रमा की प्रभा
के समान प्रभा से संयुत, दरियों में और सानुओं में (शिखरों में) सदा
यक्ष की कन्याओं से सम्मोहित, अनेक मृग गणों से सुसेवित, सैकड़ों