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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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[काली की महिमा]

• देवी वरदान देने में बहुत चतुर हैं इसलिए उन्हें दक्षिणा कहा
जाता है।
• जिस प्रकार कार्य की समाप्ति पर दक्षिणा फल देने वाली होती है
उसी प्रकार देवी भी सभी फलों की सिद्धि को देती हैं।
• दक्षिणामूर्ति भैरव ने उनकी सर्वप्रथम पूजा की इस कारण भी
भगवती का नाम दक्षिणाकाली है।
• पुरुष को दक्षिण और शक्ति को 'वामा' कहा जाता है। वही वामा
दक्षिण पर विजय पाकर महामोक्ष देने वाली बनी।
• भगवती काली अनादिरूपा आद्या विद्या हैं। हे ब्रह्मस्वरुपिणी एवं
कैवल्यदात्री हैं।
• पाँचों तत्वों तक शक्ति तारा की स्थिति है और सबके अन्त में काली
ही स्थित हैं। अर्थात् जब महाप्रलय में आकाश का भी लय हो
जाता है। तब यही भगवती काली चित्तशक्ति के रूप में विद्यमान
रहती हैं।
• इन्हीं भगवती की वेद में भद्रकाली के रूप में स्तुति की गई हैं।
• ये अजन्मा और निराकार स्वरूपा हैं। भावुक आराधक अपनी
भावनाओं तथा देवी के गुण कर्मों के अनुरूप उनके काल्पनिक
साकार रूप की स्तुति करते हैं। अपने ऐसे भक्तों को भगवती काली
मुक्ति प्रदान करती हैं।
• भगवती काली अपने उपासकों पर स्नेह रखने वाली तथा उनका
कल्याण करने वाली हैं।
• इस प्रकार भगवती की दक्षिणाकाली के नाम से अनेकानेक उपलब्धियाँ
हैं। जिस भक्त को जो भी उपलब्धि हो, या जो भी सिद्धि चाहे उसे
उसी रूप में महाकाली को स्वीकार करना चाहिए।