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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ७३
होवें। इसके अनन्तर विष्णु भगवान् को देखा गया था। परमात्मा में
लय को प्राप्त, भासमान पर तत्व, सनातन ज्योति के रूप वाले
परमतत्व देखे गये थे। इसके अनन्तर ज्ञान से परिपूर्ण, नित्य, आनन्दमय,
ब्रह्म से पर, केवल ज्ञान के द्वारा ही जानने के योग्य को देखा था और
अन्य कुछ भी नहीं देखा था। परमात्मा में उस जगत् का एकत्व और
पृथक्त्व अपने शरीर के अन्दर मर्ग, स्थित और संयमों को देखा था।
प्रकाशरूप, शान्त, नित्य और इन्द्रियों की पहुँच से परे परमात्मा
को देखा था कि ब्रह्मा एक ही पर है। जो अद्वय द्वैत से रहित है। इससे
अतिरिक्त अन्य कुछ भी नहीं देखा था। कौन भगवान् विष्णु है, कौन
ब्रह्मा है अथवा क्या यह जगत् है ? शम्भु के द्वारा परमात्मा का यह भेद
ग्रहण नहीं किया गया था। इस प्रकार से देखते हुए उनके शरीर के
सुन्दर से बाहर माया आदि निर्गत हुए थे और वृषभध्वज (शिव) में
प्रवेश कर गए थे। जनार्दन प्रभु ने अनन्यत्व और पृथक्त्व दिखलाकर
शम्भु के लिए उनके शरीर से शीघ्र ही फिर बाहर हो गये थे। इसके
उपरान्त समाधि से परित्याग करने वाले चलित आत्मा से युक्त शिव
का मन सती की ओर गया था जो शिवमाया से मोहित हो गये थे। हे
द्विजोत्तमों! फिर भगवान् हर ने दाक्षायणी के मनोहर और विकसित
कमल के आकार वाले मुख को देखा था। इसके आगे दक्ष, मारीचि
आदि मुनियों को, अपने गणों को, कमलासन (ब्रह्मा) को और
भगवान् विष्णु को वहाँ पर देखकर भगवान् शंकर अत्यन्त विस्मित हो
गये थे। इसके अनन्तर विस्मय में स्मित (मन्द मुस्कराहट) से प्रफुल्लित
मुख से संयुत वृषभध्वज महादेव से भगवान् जनार्दन ने कहा।
श्री भगवान् ने कहा-हे शंकर! जो-जो भी आपने एकत्व में और
भिन्नता में देखा और आपने तीनों देवों को स्वरूप जान लिया है।
आपने अपने अन्तर में प्रकृति, पुरुष, काल और माया को अच्छी तरह
से जान लिया है। हे महादेव! वे फिर किस प्रकार वाले हैं ? ब्रह्म एक
ही हैं और वह शान्त, नित्य, परम महत् हैं। वह किस तरह से भिन्नता
को प्राप्त हुआ और कैसा हैं यह आपने देख लिया है। मार्कण्डेय मुनि