कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context६० ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
मेरी पुत्री के द्वारा शिव समाराधित किए गए हैं और इसी के लिए उसने
स्वयं ही ऐसा किया है और वे शिव भी उनकी इच्छा करते हैं अर्थात्
सती को भार्या के रूप में पाना चाहते हैं। इसी कारण से मुझे इसको
हर के ही लिए देना चाहिए। अर्थात् मैं उन्हीं को दूँगा। वे शिव किसी
शुभ मुहूर्त और शुभ लग्न में मेरे समीप में आ जावें। हे ब्रह्माजी, उसी
समय में मैं भिक्षार्थ में शम्भु के लिए अपनी पुत्री सती को दे दूँगा।
हे वृषभध्वज ! दक्ष ने यही प्रसन्नता के साथ कहा था। इसलिए
आप किसी परम शुभ मुहूर्त में उस सती की अनुयाचना करने के लिए
उन (दक्ष) के समीप में गमन कीजिए। ईश्वर ने कहा-मैं आपके साथ
तथा महात्मा नारद जी के साथ ही यहाँ से गमन करूँगा। हे जगतों के
द्वारा पूज्य! इस कारण से आप शीघ्रताशीघ्र ही नारद जी का स्मरण
करिए। मरीचि आदि दस मानस पुत्रों को भी स्मरण करिए उन सबके
ही साथ मैं अपने गणों सहित दक्ष के निवास स्थान पर जाऊँगा। इसके
अनन्तर कमलासन प्रभु के द्वारा वे सब स्मरण किए गए थे जो मन के
समान वेग वाले ब्रह्माजी के पुत्र नारद के ही सहित थे।
तीनों देवों का एकत्व प्रतिपादन
मार्कण्डेय मुनि ने कहा-फिर वहाँ पर देवर्षि नारद जी के सहित
सभी मानस पुत्र समागत हो गये थे। ये सब ब्रह्माजी के द्वारा किए हुए
केवल स्मरण से ही बात के द्वारा विशेष प्रेरित जैसे होवें वैसे ही सब
वहाँ उपस्थित हो गए थे। उनके साथ और ब्रह्माजी के साथ में अपने
गणों के साथ में लेकर भगवान् शम्भु मोह से संगत होते हुए दक्ष के
निवास मन्दिर में गये थे। इसके अनन्तर उनके कर्म के योगी काल के
आने पर गणों ने शंख, पट्टह, डिण्डिम, सूर्यवंशी को वादित किया
था और आनन्द से युक्त हुए वे सब शंकर का अनुगमन करते हैं। कुछ
ताल बजा रहे थे और कोई करतलों के द्वारा अघ्रितल की ध्वनि कर
रहे थे। वे सब अपने अति वेग वाले विमानों के द्वारा वृषभध्वज का
अनुगमन करते हैं। अनेक तरह की आकृतियों वाले गण भारी