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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 58 of 442

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Page 58

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ५९
उसी भाँति उनके द्वारा सती की आराधना की जा रही है। इसलिए हे
दक्ष! शम्भु के लिए परिकल्पित अपनी पुत्री सती को बिना विलम्ब
किए हुए उनको दे दो उसी से आपकी कृतकृत्यता अर्थात् सफलता है।
मैं उनको नारद द्वारा आपके आलय में ले आऊँगा। उसके लिए आप
भी इस सती को जो कि उन्हीं के लिए परिकल्पित है उन्हें दे दो।
मार्कण्डेय मुनि ने कहा-दक्ष ने 'ऐसा ही होगा', यह दक्ष ने ब्रह्माजी
से कहा था और ब्रह्माजी भी वहाँ से उसी स्थान पर चले गए थे जहाँ
पर भगवान् शम्भु विराजमान थे। ब्रह्माजी के चले जाने पर दक्ष
प्रजापति भी अपनी दारा और तनया के साथ आनन्दयुक्त हो गया था
और पीयूष से परिपूरित की ही भाँति पूर्ण देह वाला हो गया था।
इसके अनन्तर कमलासन ब्रह्माजी भी मोद से प्रसन्न होकर महादेवजी
के समीप प्राप्त हो गये थे जो कि हिमालय पर्वत पर संस्थित थे।
वृषभध्वज ने उन आते हुए लोकों के स्रष्टा को देखकर वे सती की
प्राप्ति में बारम्बार मन में संशय कर रहे थे। इसके अनन्तर दूर ही ही
से साम से समन्वित ब्रह्माजी को महादेवजी ने जो कामवासना को भस्म
में धारण किए थे और कामदेव के द्वारा उन्मादित हो गये थे, कहा था।
ईश्वर ने कहा-हे ब्रह्माजी ! आपके पुत्र (दक्ष) ने सती के अर्थ में स्वयं
क्या कहा था ? आप मुझे बतलाइए जिससे कामदेव के द्वारा मेरा हृदय
विदीर्ण न किया जावे। बाधमान विप्रयोग सती के बिना मुझको हनन
कर रहा है। हे सुरश्रेष्ठ! यह कामदेव अन्य सब प्राणियों का त्याग कर
मेरे ही पीछे पड़ा हुआ है। हे ब्रह्माजी! वह सती जिस तरह से भी मुझे
प्राप्त हो जावे वही आप शीघ्र ही करिए। ब्रह्माजी ने कहा-हे
वृषभध्वज! सती के अर्थ में जो मेरे पुत्र (दक्ष) ने कह दिया था उसको
आप सुनिए और अपना साध्य सिद्ध हो गया, यही अवधारित कर
लीजिए।
उसने कहा था कि मुझे मेरी पुत्री उन्हीं के लिए देने के योग्य है
और उनके लिए ही वह परिकल्पिता है। यह कर्म तो मुझे भी अभीष्ट
था ही किन्तु अब आपके वाक्य से पुनः अधिक अभीप्सित हो गया है।