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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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६०८ श्रीकालिका पुराण ६०८ ४३
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के स्वामी ब्रह्माजी वहीं पर अन्तर्धान हो गये थे और कामदेव अपने
गणों के सहित उसी समय में भगवान् शम्भु के समीप चला गया था ।
इसी बीच में प्रजापति दक्ष चिरकाल तक तपस्या में रत होता हुआ
बहुत प्रकार के नियमों से सुन्दर व्रतधारी होकर देवी की समाराधना में
निरत हो गया था । हे मुनि सत्तमों! फिर नियमों से युक्त और योगनिद्रा
देवी का यजन करने वाले दक्ष प्रजापति के समक्ष में चण्डिका देवी
प्रत्यक्ष हुई थी । इसके अनन्तर प्रजापति दक्ष प्रत्यक्ष रूप से जगन्मयी
विष्णुमाया का दर्शन प्राप्त करके अपने आपको कृतकृत्य अर्थात्
पूर्णतया सफल मानने लगा था ।
अब भगवती के रूप का वर्णन किया जाता है कि वह देवी
बालिका परम स्निग्ध, कृष्ण वर्ण के संयुत, पीन (स्थूल) और उन्नत
स्तनों वाली थी। उसकी चार भुजायें थीं तथा परमाधिक सुन्दर उसका
मुख था और नीलकमल को धारण करने वाली परमशुभ थी। वरदान
तथा अभयदान देने वाली, हाथ में खंग धारण करती हुई सभी गुणों
से समन्विता थी। उसके नयन थोड़ी रक्तिमा लिए हुए थे और सुन्दर
और खुले हुए केशों वाली थीं एवं परम मनोहर थीं। प्रजापति दक्ष ने
उनका दर्शन प्राप्त करके परम प्रीति से युक्त होकर विनम्रता से उस
देवी की स्तुति की थी। दक्ष ने कहा-आनन्द के स्वरूप वाली और
सम्पूर्ण जगत् को आनन्द करने वाली, सृष्टि पालन और संहार के
स्वरूप से संयुत, परमशुभा भगवान् हरि की लक्ष्मी देवी का मैं स्तवन
करता हूँ। हे महेश्वरि! सत्व गुण के उद्वेग के प्रकाश से जो उत्तम ज्योति
का तत्व है जो स्वप्रकाश जगत् का धाम है, वह आपका ही अंश है।
रजोगुण की अधिकता से जो काम का प्रकाशन है वह हे जगन्मयी!
मध्य स्थित राग के स्वरूप वाला वह आपके ही अंश का अंश है।
तमोगुण के अतिरेक जो मोह का प्रकाशन है जो कि चेतनों का
आच्छादन करने वाला है वह भी आपके अंशांश को गोचर है। आप
परा हैं और परास्वरूप वाली हैं, आप परमशुद्ध हैं, निर्मला हैं और
लोकों को मोह करने वाली हैं। आप तीन रूपों वाली, त्रयी (वेदत्रयी),