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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 43 of 442

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Page 43

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४४ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅༄༅

कीर्ति, वार्ता और इस जगत् की गति हैं। जिस निजोत्थ मूर्ति के द्वारा
माधव धात्री का विभरण करते हैं वह आपकी ही मूर्ति है, जो समस्त
जगतों के उपकार करने वाली है। आप महान् अनुभव वाली सूक्ष्मा
और अपराजिता विश्व की शक्ति हैं जो ऊर्ध्व और अधो के विरोध
के द्वारा पवनों से पर का व्यक्तिकरण किया जाता है वह ज्योति
आपके मात्रार्थ के भावसम्मत सात्विक जिसका योगीजन बिना आलम्ब
वाणी, निष्कल, परम निर्मल आलम्बन किया करते हैं वह तत्व आपके
ही अनन्तर गोचर है। जो प्रसिद्धा, कूटस्था, अति प्रसिद्ध और निर्मला
है। वह ज्ञप्ति आपकी निष्प्रपञ्चना और प्रपञ्चामी प्रकाशिका है आप
विद्या हैं और आप अविद्या हैं आप आलम्बा हैं और बिना आश्रय
वाली हैं। आप प्रपंच रूप से संयुत जगतों की आदिशक्ति हैं और
आप ईश्वरी हैं।
जो ब्रह्माजी के कण्ठ के आलय वाली और शुद्ध वाग्वाणी पायी
जाती है वह वेदों के प्रकाशन में परायण तथा विश्व को प्रकाशित
करने वाली आप ही हैं। आप अग्नि हैं तथा स्वाहा विश्व को प्रकाशित
करने वाली आप ही हैं। आप अग्नि हैं तथा स्वाहा हैं। आप पितृगणों
के साथ स्वधा हैं। आप नभ हैं और आप कालरूपा हैं। आप दिशायें
हैं और आप आकाश स्थिता हैं। आप चिन्तन करने के अयोग्य हैं,
आप अव्यक्त हैं तथा आप आपका रूप अनिर्देश्य है। आप ही
कालरात्रि हैं और आप ही परमशान्त परा प्रकृति हैं। जिसका संसार
और लोकों में परित्राण के लिए जो रूप गह्मर है वह आपको जानते
हैं अन्यथा परा आपको कौन जानेंगे। हे भगवती ! आप प्रसन्न होइए,
हे अग्ने ! हे योगरूपिणि ! आप प्रसन्न होइए। हे घोररूपे ! आप प्रसन्न
होइए। हे जगन्मयि ! आपके लिए मेरा नमस्कार है। मार्कण्डेय मुनि ने
कहा- इस रीति से प्रयत आत्मा वाले दक्ष के द्वारा स्तुति की गई
महामाया दक्ष से बोली, यद्यपि उस दक्ष के अभीष्ट को स्वयं जानती
हुई भी थी तथापि देवी ने उससे पूछा था।
भगवती ने कहा-हे दक्ष! आपके द्वारा अत्यधिक की गई इस मेरी