कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context२६८ श्रीकालिका पुराण
गुरुजनों के मुख का अवलोकन नहीं कर रही हैं। इसी बीच सात
ऋषियों का मरीचि जिनमें प्रधान थे उन मुनियों का चन्द्रशेखर प्रभु ने
उस समय काली का प्रार्थना करने के लिए चिन्तन किया था। उसी
क्षण में कामदेव के अरि शम्भु के द्वारा चिन्तन किये हुए मुनिगण
किसी के द्वारा आकृष्ट हुए की ही भाँति उनके समीप में समागत हो
गये थे। भगवान् शम्भु ने मुनियों को दीपित सात अग्नियों के ही समान
देखा था और वसिष्ठ मुनि ने समीप में सती अरुन्धती को भी देखा
था। शिव ने मुनियों द्वारा भी न वर्जित किया हुआ योषित् का ग्रहण
करना धर्म मान लिया था। फिर उन समस्त मुनियों ने वृषभध्वज की
पूजा करके स्मरण से समाकर्षित हुए प्रहर्ष से यह उन्होंने प्रिय बोला था।
ऋषियों ने कहा-जो प्रत्यक्ष शुद्ध रूप दिखाई देता है वह चन्द्र से
प्रसिद्ध और चन्द्र के खण्ड से उपशोभित है। अन्तर में प्रज्ञ मुनियों का
वह भावित स्वरूप है। युक्तों के द्वारा भाग्य के उदय होने से भाग्य
देखा गया है। प्रज्ञा के अधीन, ध्यान, तन्त्र, नित्य ध्यान करने के योग्य,
नित्य और स्वप्रकाश है अर्थात् अपने ही से प्रकाश वाला है। वाह्य
तत्त्व से निरन्तर पुञ्जीभूत और समुचित प्राप्त करने के योग्य भगवान्
शम्भु का उदार धाम है। नेत्र के सहित जिसके अग्रभाग को देख कर
ही सूर्य के समान दर्शन ही परित्राण के लिए होता है। यह स्थान शर्व
का नित्यधाम है। स्तुति करने के योग्य शम्भु के उस देह को भक्ति
से नमस्कार है। जो प्रथम आदि भाग से प्रकाश करता है, जो वाम
भाग स्थित है वह यहाँ पर ही नेता हैं, भगवान् हर के ललाट में विशेष
रूप से शक्ति धारण किये हुए वह हमारी अपनी सिद्धि के लिए प्रथम
होवे। जो प्रधान के स्वरूप वाला सत्त्व, रज और तम से समन्वित हे
वह पुरुष समस्त जगतों का हर हमारे ऊपर प्रसन्न होवे। इस प्रकार से
मुनिगण ने विनय से अवनत होते हुए देवों की भली-भाँति स्तुति करके
कहा कि आपने किस प्रयोजन के लिए हम लोगों का स्मरण किया है
उसे आप बताइये। उस मुनियों के उस वचन का श्रवण करके भगवान्
शंकर ने हास करते हुए उन मुनियों से सबको पृथक्-पृथक् सम्भाषण
करके कहा था।