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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 176 of 442

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Page 176

१७८ শ্রীকালিকা পুরাণ

है और इसके अतिरिक्त अन्य सब सारहीन है। इसी प्रकार से इसका
ज्ञान प्राप्त करके महा बुद्धिमान नित्य ही गमन किया करते हैं।
ऋषियों ने कहा-जो भगवान शम्भु के द्वारा पूर्व में चार प्रकार के
भूत ग्राम सृष्ट किये थे अर्थात् जो चार तरह के भूत ग्रामों का पूर्व में
सृजन किया था वे किस प्रयोजन की सिद्धि के लिए समुत्पन्न हुए थे
और किस तरह से उनको अनेकरूपता हुई थी ? उनका आधा शरीर तो
वाराह का है और आधा दन्ताबल है। कुछ-कुछ गणों के अवयव तो
सिंह, व्याघ्र के शरीर से हुए थे। वे गण किस कारण से महान क्रूर
थे और महान ओज वाले थे। किन भागों वाले थे यह सब हम लोग
श्रवण करने की इच्छा रखते हैं हे द्विजश्रेष्ठ! हमारी ऐसी ही इच्छा है।
मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-हे मुनियों! अब लोग श्रवण कीजिये कि
जिस रीति से भगवान शम्भु के गण हुए थे ओर आप जिसके लिए वे
समुत्पन्न हुए थे और जिस कारण से वे एकरूप वाले नहीं थे। यह
विषय बहुत ही अधिक गोपनीय है और यह धर्म, अर्थ और काम के
प्रदान करने वाला है। यह परम तेज है और निरन्तर परम तप है। इस
महान आख्यान का श्रवण करके पुरुष इस लोक में और परलोक में
दुःख नहीं प्राप्त किया करता है। यह आख्यान यश देने वाला है, धर्म
से युक्त है, आयु की वृद्धि करने वाला है और परम तुष्टि तथा पुष्टि
का प्रदान करने वाला है।
ईश्वर ने कहा-हे विभो! आपने जिसके वाराह के स्वरूप को
कल्पित किया था वह आपने पूर्ण कर दिया है कि आपने इस पृथ्वी
को यथावत् स्थापित कर दिया है। आपके ही प्रसाद से सब सागरों का
संस्थान और नदियों का तथा क्षिति का संस्थान हुआ था और ब्रह्मा के
द्वारा की हुई सृष्टि भी उत्पन्न हुई थी। आप सबसे परिपूर्ण हैं, यज्ञमय
हैं तथा तेज से परिपूर्ण हैं आप समस्त गुरुओं के भी गुरु हैं तथा आप
पर से भी पर हैं। हे जगत्पते! विकीर्ण हुई पृथ्वी आपको वहन करने
में समर्थ नहीं है। पहले आपके द्वारा स्थापित शैलों के संघातों से
यन्त्रित यह पृथ्वी है। उस कारण से हे जगतों के स्वामिन्! इस वाराह