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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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൵ श्रीकालिका पुराण ൵ १५९
प्रपंच के लिए जगतीतल में गये थे। फिर कैटभारी प्रभु ने उनकी
निःसारता को किस प्रकार से दिखलाया था ? हे द्विजश्रेष्ठ! उन्होंने
फिर सारतर, गोपनीय, सनातन परज्योति को दिखलाया था ? वह सत्य
बतलाइए। यही हम सब श्रवण करने की इच्छा करते हैं। यह अतीव
अद्भुत है उसे हम आप मुनीन्द्र के मुख से ही सुनने के इच्छुक हैं। आप
इसको विस्तारपूर्वक कहिए क्योंकि यह परम निःश्रेयम धर्म है।

सर्ग इत्यादि का वर्णन

मार्कण्डेय मुनि ने कहा-हे द्विजश्रेष्ठों! मैं आदि सर्ग वाराह का
वर्णन करूँगा जिस तरह से कल्प-कल्प में वाराह में जैसी सृष्टि हुई
थी। भगवान् हरि ने प्रतिसर्ग में उसी भाँति आदि सृष्टि को दिखलाकर
भगवान् शम्भु के लिए प्रलय आदि को दिखलाया था, इसे समझ लो।
सबसे प्रथम मैं प्रलय का प्रर्णन करूँगा। उसके पीछे आदि सर्ग को
बतलाऊँगा। हे विप्रो! प्रति सर्ग में फिर वाराह का ज्ञान प्राप्त कर लो।
काल के एक अंश को निमेष कहा जाता है जो नेत्रों के उन्मेष से विशेष
लक्षित हुआ करता है। उन अठारह निमेषों से एक काष्ठा होती है और
तीस काष्ठाओं की एक कला है। उतनी ही अर्थात् बीस कलाओं से
एक क्षण नामक कहा गया है। बारह क्षणों से एक मुहूर्त कहा गया है
तथा बीस मुहूर्तों से मनुष्यों का अहोरात्र होता है और पन्द्रह अहोरात्र का
एक पक्ष होता है। पक्षों में मनुष्यों के वर्ष होते हैं जो कि पितृगणों का
एक अहर्निश हुआ करता है। बारह मासों का एक वर्ष होता है जो देवों
का एक अहोरात्र ही है। पितृगणों के कर्म के लिए कृष्ण पक्ष ही दिन
माना गया है।
स्वप्न अर्थात् शयन करने के लिए शुक्ल पक्ष होता है जो रजनी
कही गई है। उत्तरायण सूर्य के होने पर छः मास देवों का दिन कहा
गया है। दक्षिणायन के छः मास देवों की रात्रि शयन करने की हुआ
करती है। सूर्य के समुत्पन्न दो-दो मासों से ऋतु कहा गया है। तीन
ऋतुओं का एक अयन होता है जो मनुष्यों का माना गया है। छः