कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context१३८ श्रीकालिका पुराण
प्रदाता यह रूप है उन प्रभु के लिए मेरा नमस्कार है। विद्या के आकार
से उद्भावना करने के योग्य प्रकृष्ट रूप से भिन्नसत्व से छन्न-ध्यान
करने के योग्य आत्मस्वरूप से समन्वित, सार, पार और पावनों को भी
पवित्र करने वाला जिनका रूप है उनके लिए मेरा प्रणिपात है। योग
मार्ग में युक्त पुरुषों के द्वारा गुणों के समूह आठ अंग वाले योग से जो
नित्यार्चन और व्यय से हीन चिन्तन किया जाता है, जिसकी योगीजन
अपने ज्ञान योग में व्यापी तत्त्व को प्राप्त करके परात्पर को प्राप्त हुए
हैं, जो शुद्ध रूप वाले हैं और जो मनोज्ञ हैं, जो गरुड़ पर विराजमान
हैं, जिनका प्रकाश नील मेघ के समान है, जो शंख, चक्र, गदा और
पद्म को धारण करने वाले हैं उन योग से युक्त आपके लिए मेरा
प्रणाम समर्पित है।
जिनका गगन, भूमि, दिशायें, जल, ज्योति, वायु और काल
स्वरूप है उनके लिए मेरा नमस्कार है। जिनके कार्यों के अगस्थ में
प्रधान और पुरुष निवास किया करते हैं उन अव्यक्त रूप वाले गोविन्द
के लिए नमस्कार है। जो स्वयं हैं और जो भूत हैं, जो स्वयं उसके गुणों
से पर हैं, जो स्वयं ही इस जगत का आधार हैं उनके आपके लिए
नमस्कार है तथा बारम्बार प्रणाम है। जो सबसे पर तथा पुराण हैं, जो
पुराणपुरुष और जगन्मय परमात्मा हैं जो अक्षय और व्यथा से रहित हैं
उस देश के लिए बारम्बार नमस्कार है। जो ब्रह्मा का स्वरूप धारण
करके इस सृष्टि की रचना किया करते हैं और जो विष्णु से स्वरूप
से इस जगत् का परिपालन करते हैं तथा जो रुद्र के रूप में होकर इस
जगत् का संहार किया करते हैं उस आपकी सेवा में बारम्बार मेरा
प्रणिपात समर्पित है। कारणों के भी कारण, दिव्य अमृतज्ञान और
विभूति के प्रदाता, समस्त अन्य लोकों को मोह के दाता हैं उन प्रकाश
स्वरूप वाले परात्पर के लिए बारम्बार नमस्कार हैं। जिसका महान
प्रपञ्च जगत् कहा जाया करता है जो भूमि, दिशायें, सूर्य, चन्द्र,
मनोजव, वह्नि, मुख, नाभि से अन्तरिक्ष है उन भगवान हरि आपके
लिए नमस्कार है।