कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in contextआपके लिए नमस्कार है। नियत इन्द्रियों वाले योगियों के द्वारा निरन्तर
चिन्तन किये हुए सार का भी आप सारभूत हैं। ऐसे परमात्मा दक्ष के
लिए नमस्कार है। योगियों की वृत्ति को अनाधृष्ट करके पारगामियों
में परायण सहसा ही आद्यन्न कहा गया है उनके लिए नित्य ही नमस्कार
है, नमस्कार है। इन प्रकार से कहे हुए उन यज्ञ के भागों का सेवन
करने वालों के वचन को सुनकर दक्ष प्रसन्न मुखवाला होकर मुख्य रूप
से इन्द्रदेव को सम्बोधित करके बोले। दक्ष ने कहा-हे महाबाहो! हे
इन्द्रदेव! आपको यह महान् दुःख कैसे प्राप्त हो गया है? हे विभो!
आप इस दुःख का हेतु तो बतलाइए। मैं उसके श्रवण करने की इच्छा
कर रहा हूँ। आप लोगों के दुःख को दूर करने के लिए मेरा क्या
कर्त्तव्य होता है? उसको यदि मैं कर सकता हूँ तो अवश्य ही करूँगा।
मार्कण्डेय मुनि ने कहा-उस महान आत्मा वाले ब्रह्माजी के पुत्र के वचन
का श्रवण करके नीतिक्षेत्र वाक्पति इन्द्रदेव ने उस महामुनि से कहा था।
शचीपतिशक्र ने कहा-निशानाथा चन्द्रक्षयी अर्थात् क्षय होने वाला
हो गया है। उसके क्षीण हो जाने पर सभी औषधियां क्षय को प्राप्त
हो गई हैं। हे द्विजश्रेष्ठ, उनकी हानि यज्ञों की हानि करने वाली हैं।
कुछ तो प्रजा वृष्टि के अभाव से महान दुःख को पाकर नष्ट हो गई
है। यह निशानाथ चन्द्रमा का जो क्षय है वह आपके ही कोप से प्रवृत्त
हो गया है और इस क्षय से पूरे जगत् का ही विनाश हो जायेगा। इस
समय में ऐसा कुछ भी नहीं है जो क्षोभ से युक्त न हो। हे विप्रेन्द्र! इस
समय सभी विलुप्त हैं चाहे स्थावर हो या जंगम होवे या पतंग ही होवे।
इस समय से न तो यज्ञ सम्प्रवृत्त हो रहे हैं और तापस गण ही तपश्चर्या
किया करते हैं। आहार के अभाव के कारण होने वाले दुःख से समस्त
प्रजा क्षीण और भय से आतुर हैं। हे विपेन्द्र! ऐसा प्रवृत्त होने पर इस
रसातलिक से जब तक दैत्य उठकर बाधा नहीं पहुँचाते हैं तभी तक
आप उद्धार कीजिए। हे दक्ष! चन्द्रदेव पर प्रसन्न होइए और अपने तप
के बल से उसे पूर्ण बना दीजिए। चन्द्रदेव के परिपूर्ण हो जाने पर
सम्पूर्ण जगत् प्रकृति में स्थित हो जायेगा।