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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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Page 115

११६ || श्रीकालिका पुराण ||
से समाकुल होकर कुछ भी नहीं बोली थी । इसके अनन्तर परमाधिक
क्रोधी हुए चन्द्र ने उसी समय में उन सब स्त्रियों को शाप दिया था
क्योंकि तुम सबने मेरे ही आगे अतीव उग्र और तीक्ष्ण वचन कहे हैं ।
इन तीनों भुवनों में कृत्तिका आदि आपकी उग्र और तीक्ष्ण यही गति
देवगणों में भी प्राप्त करोगी । इस कारण से ये नौ कृत्तिका प्रभृत्ति दिन
यात्रा में उपयुक्त नहीं होगी । तुम सबको देवी देव आदि और क्षिति में
मनुष्य आदि देखते हैं तो उसी दोष से यात्रा में उन पुरुषों की यात्रा
अभीष्ट के प्रदान करने वाली नहीं हुआ करती है । इसके उपरान्त उन
सबों ने उसके अति दारुणी शाप को सुनकर इस शाप के देने से
चन्द्रमा के हृदय को बहुत ही अधिक निष्ठुर जान लिया था ।
उस समय वे सब अति कुपित होकर दक्ष प्रजापति के भवन को
चली गयी थीं और वहां पर अश्विनी आदि ने अपने पिता दक्ष से कहा
था- सोम हमारे साथ निवास नहीं करते हैं और वे सदा ही एक
रोहिणी का ही सेवन किया करते हैं। हम लोग सभी उनकी सेवा भी
करती हैं तो भी वे पराई वधू की ही भाँति हम से अनुराग न करके
हमारा सेवन नहीं किया करते हैं। अवस्थान में, अवसान में तथा भोजन
में और श्रवण करने में चन्द्रदेव रोहिणी के साथ निवास करते हुए
समीप में आपकी इन पुत्रियों को देखकर रोहिणी के बिना कोई भी
शान्ति की प्राप्ति नहीं किया करते हैं । वह अन्य स्थान में गमन करती
हुई को देखकर नयन का आधान करके नहीं देखा करते हैं । इस वस्तु
में जो भी कुछ करना चाहिए वह हमारे द्वारा चन्द्र अनिरुद्ध हुए हैं उस
समय उसने हमारे लिए तीव्र शाप किया था । चन्द्रदेव ने कहा था कि
आप लोग अत्यन्त दारुण और तीक्ष्ण होती हुई शोक में वाच्यत्व को
प्राप्त करके बिना यात्रा वाली हो जाओगी ।
मार्कण्डेय मुनि ने कहा-उस प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्रियों का
वाक्य सुनकर और उनको ही साथ में लेकर उसी स्थान पर गये थे जहाँ
चन्द्रदेव रोहिणी के साथ उस समय में वर्त्तमान थे । चन्द्रमा दूर से आते
हुए दक्ष को देखकर अपने आसन से उठ खड़े हुए थे और समीप