कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1427, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ेंजनधर्मबोध
( ५१ )
अथ चौबीस तीर्थकरके नाम वर्णन
दोहा-ऋषभ नाथ प्रथमै कहो, अजित नाथ कह फेर ।
शंभो अभिनंदन कहो, सुमतिनाथजी टेर ॥
पदम प्रभू क्षुपारसो, चंद्र प्रभू बखान ।
पुष्पदंत शीतल श्रेयस, वासपुञ्ज पुनि जान ॥
बिमल अनन्तो धर्मनाथ, शांतिकुन्थ नाथोय ।
अर्हनाथ अरु मल्लजी, मुनि सुवृत्त कह जोय ॥
निमनाथो नेमनाथ कह, पारसनाथ कहोय ।
महावीर नाथो कहो, अन्त तिर्थकर सोय ॥
इति
अथ बारह चक्रवर्तियोंके नाम
दोहा-भरथ सगर मघवा कहो, सनतकुमार गनाय ।
सांतिनगधकुंथनाथजी, अर्हनाथ कहवाय ॥
पुनि सुभूमि पञ्चो विजय, हरिखेनो ब्रह्मदत्त ।
सारी पृथ्वी बश करे, कर निज्ज चक्र गहत्त ॥
अथ नौ बलिभद्रके नाम
दोहा-विजय अचलजी धर्मधर, बहुरि सुप्रभुजी होइ ।
फेर सुदर्शन जानिये अरु सुनन्द कहै जोइ ॥
नन्दमित्र पुनि लेखिये, रामचंद्र पुनि जान ।
पञ्च फेर कहि मानिये, नौ बलिभद्र प्रमान ॥
अथ नौ नारायणके नाम
दोहा-प्रथम दुपिष्ट तृपिष्टजी, बहुरि स्वयंभू गाय ।
पुरुषोत्तम नरसिंहजी, पुण्डरीक बतलाय ॥
केवल दत्त बखानिये, फेर लक्ष्मण मान ।
कृष्णचन्द्र नौमैं कहो, यदुकुल दीपक जान ॥