कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextसमीक्षा — कृपालू जो खुदा रहीम है रहमान है, उस खुदाका हुकम जबह एवं कत्ल करनेका हरगिज नहीं हो सकता, नहीं तो रहीम और रहमान नह हो सकता. यह किसीको खबर नहीं कि, रहीम और रहमानके कौनसे गुण होते हैं वह खुदा कौन है। कत्ल (रक्तपात) करानेवाला खुदा कौन है। किसी जीवधारीके गलेपर छूरी चलाना ईमान और बुद्धिके विरुद्ध है। यह मानुषिक बुद्धिसे तो एक-दमही उलटा है। छूरी चलानेके समय, विसमिल्लाह जब्बारुल जब्बारही कहारुल कहार, कहना उचित है। क्योंकि, विसमिल्लाह हिरहेमानिरहीमकी यह जगह नहीं है। जिस समय हाथमें छूरी ली उसी समय रहीमुरहीमोंकी सिफत जाती रही। जिसके ऊपर विसमिल्लाह रहीमुरहीमोंके साथ कल्मा न पढ़ा जायगा तो वह बिलकुल हराम हो जायगा। जो कोई रहीमका नाम लेकर छूरी चलावेगा उसपर अलबत्त ईश्वरका कोप होगा, वह ईश्वरकी कृपाका पात्र कभी न होगा। जो कोई इस विसमिल्लाहके अर्थके ऊपर विचार न करेगा, चाहे कुरान हबीस फिकका आदि सब कुछ पढ़े पर सब निरर्थक है, अगर रहीमके नामसे जबह हुई तो भी हराम हुई। रहीमको छोड़कर दूसरा कुछ कहा तो भी हराम हुई, बस इससे साबित हुआ कि, जिसने मांस खाया हराम खाया वो मुसलमान नहीं है।
कत्ल पर गैरके यह विसमिल्लाह। होवे हरगिज न तुझपर रहम अल्लाह।
बाशरअ और तिहारतो तकवा। सब अबस होवे अन्दरू स्याह ॥
११४ सूरते कुरानमें हैं सब सूरतोंके माथेपर यही है दूसरा कुछ नहीं। जिस सूरतमें जबह और कत्लका हुकम उत्तरा वह हुकम रहीम और रहमान अल्लाह के तरफसे कभी नहीं माना जा सकता. क्योंकि, रहीम यानी दयालू हत्यापर कभी भी प्रसन्न नहीं हो सकता, इससे यह सिद्ध हुआ कि, रहीम और रहमान अल्लाह दूसरा है जब्बार (अत्याचारी) खुदा दूसरा है, जिसके तरफसे अत्याचार है प्रत्येक सूरतके माथेके ऊपर यही है। ऊपर रहीम रहमान रखकर नीचे अत्याचार की आज्ञा देना धोखा नहीं तो और क्या हो सकता है।
कुरान सूरे हज-३७ सिपारा ४ स्कूअ ३७ आयतमें लिखा है अल्लाहको नहीं पहुँचेगा, उसका गोस्त या लौह, लेकिन उसको पहुँचता है तुम्हारे दिलको अधीनता, इसी तरह उनको दिया मैं तुम्हें कि अल्लाहकी बड़ाई पढ़ो, इस पर कि, तुमको राह समझावे और खुशी सुनानेवालेको।
कुरान सूरेबकर २१ सिपारा स्कूअ ६९ आयत लोगो खाओ जमीनकी चीजों में से जो हलाल और सुथरी है न चलो कदमों शैतानके कि, वह तुम्हारा पक्का शत्रु है।