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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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याँकी कोई आवश्यकता नहीं रह जाती। परिश्रमी मक्खियोंके लिये जाड़ेका कड़ाका असाध्य है। वे सब मिलकर सुस्त मक्खियोंसे यह सलूक करती हैं कि, वह मेहनती मक्खियां निकम्मी मक्खियोंको मार डालती हैं। मधु गूह भन-भनाहटके शब्दसे भर जाता है। सुस्त भरी मक्खियां और चालाक मक्खियां आपसमें लड़ाई करती हैं। परिश्रमी मक्खियां सुस्त मक्खियोंको मार डालती हैं, सुस्त मक्खियोंका उद्योग व्यर्थ होता है। परिश्रमी मक्खियोंके डंक उनके शरीरसे छिदकर पार हो जाते हैं मरे हुओंके पृथिवीपर ढेर हो जाते हैं। बेलकटन साहबके कथनानुसार यह क्रीड़ा स्वभावतः बनैला है।

यह सारा हाल बीटन साहबकी नेचरल डिक्शनरी और दूसरी अङ्गरेजी पुस्तकोंमें पूर्ण रूपसे लिखा हुआ है, यहाँ तो संक्षेपसे लिखा गया है।

जलचर ।

मैं जलके जीवोंकी बुद्धिका वर्णन क्या करूँ, इनकी बुद्धिमानोकी बहु-तेरी बातें लिखी हैं परमेश्वरने इनका खाना पीना पानीही बनाया है यद्यपि वे आखेट भी करते हैं तो भी पानीके भोजनसे पानीही होकर रहते हैं। इनकी बुद्धि स्थलके जीवोंसे कम नहीं है।

घड़ियाल बिल्ली और लोमड़ी—ली साहबने लिखा है कि, एक मनुष्यने अमेरिका देशका भ्रमण करते हुये घड़ियालके बच्चेको पकड़ लिया उसने उसको भली प्रकार पाला। यहाँतक कि, घड़ियाल कुत्तेकी तरह उसके पीछे २ फ़िरा करता था। एक बिल्लीके बच्चेसे उसकी दोस्ती हो गई। न्यूयार्क नगरमें बिल्ली आगके सामने तापनेको बैठती तो घड़ियाल भी उसके समीप जाता उसपर अपना शिर धर कर सो जाता। इस बिल्लीकी जुदाईसे घड़ियाल बहुत बेचैन हो जाता आपसमें साथ रहनेसे प्रसन्न रहते। एक लोमड़ी थी उससे घड़ियाल अप्रसन्न रहा करता था। क्योंकि, लोमड़ी कुछ ऐसे खेल किया करती थी जो घड़ियालको नापसन्द थे इसी कारण उससे रुष्ट रहता था रुष्ट होकर लोमड़ीको दण्ड दिया करता था। पर दण्डदेनेमें अपने मुँहको काममें नहीं लाता था केवल अपनी पूछद्दारा उसको थोड़ा सा दण्ड दे देता था क्योंकि, यदि जोरसे लगाता तो लोमड़ी उसी समय मर जाती।

घरेला घड़ियाल—आक्सफोर्डकी सड़कके पास एक स्त्री रहती थी। उसने एक घड़ियाल पाला था मुँह खोलकर उसको खिलाया करती थी। उस घड़ियालको वह बहुत प्यार किया करती थी उसको वह आगके सामने ठोंकती वह भी घरैला होकर उसके साथ उसके घरमें रहा करता था।