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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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बिल्लीके रूपमें घात—बिल्लियां छोटे छोटे लड़की लड़कोंको मार लेती हैं। कभी कभी युवक स्त्री अथवा पुरुषको भी मार लेती हैं पर किसीको यह सुधि नहीं रहती कि, यह डायन है अथवा बिल्ली है कौन ?

स्त्रीकी हत्या — इसी किताबमें लिखा है कि, एक स्त्री सहसा चिल्ला कर पृथिवीपर गिरकर तड़पने लगी। लोग बाहरसे दौड़े आये देखा कि गला काटा हुआ है, रक्त बह रहा है। लोगोंने इधर उधर देखा तो कोई कारण न दिखाई दिया। न जान पड़ा कि, किस प्रकार उसका गला कटा। पर छतके ऊपर एक भयानक बिल्ली बैठी थी उस स्त्रीकी ओर क्रोधित होकर देख रही थी। इससे जान पड़ा कि, उसी बिल्लीने उसका गला काटा था। भारतवर्षमें डायन स्त्रियाँ लड़के तथा लड़कियोंके कलेजे बड़ी विधिसे खाया करती हैं।

चीलके रूपमें बूढ़ी डाईन — सेण्ट जान साहब डायनकी एक विचित्र कहानी लिखते हैं। वह इस प्रकार है कि, एक बूढ़ी स्त्री एक बनमें रहा करती थी। जहाँ वह रहती थी वहाँ एक झील थी डायन मनुष्य तथा पशु दोनों को बड़ी हानि पहुँचाया करती थी। उस परगनाके लोगोंने उस डायनको बहुत रोकना हटाना चाहा अनेक बार आत्मिक युक्तियोंद्वारा उसे परास्त करना चाहा उसपर आक्रमण, किया। अन्तमें वह कहीं छिप गई किसीको कुछ न जान पड़ा कि, कहाँ चली गई कहीं आस पासमें है वा नहीं दूरपर है। उसीके कारण मनुष्य तथा पशुओंमें सैकड़ों ही रोग होते थे। अन्तमें एक मनुष्यने देख लिया कि, वह झीलके किनारे पत्थरों के समीप उड़ उड़ कर फिरती है। लोग भली प्रकार ताड़ने लगे वह प्रायः जाती आती और फड़फड़ाती जान पड़ती थी। अनेक बार लोगोंने उसको गोली मारी पर नहीं लगी।

बमूलेके रूपमें मारा—आखिर एक वीर पुरुषने यह स्थिर किया कि, मैं इसको मार कर देशको आपत्तिसे बचाऊंगा। लोगोंसे कहा कि, मैं निश्चय विजय प्राप्त करूँगा। इसी कारण वह बन्दूक भर कर जहाँ वह रहती थी उसी पर्वत पर छिप कर बैठ गया। प्रतीक्षा करने लगा कि, डायन आवे तो मैं उसे गोली मार दूँ। सारी रात बीत गई मदिराके नशेसे वह वहाँ बड़ी चौकसीसे बैठ रहा था। अन्तमें बड़े घोर वायुमें एक विचित्र शब्द सुना देखा कि, डायन बगुलाका स्वरूप धारण किये उसी सिपाहीकी ओर चली आती है। सिपाही विचारने लगा कि, यदि मैं अपने घरमें होता तो अच्छा था क्योंकि, उसके हाथ सर्दीसे इतने अकड़ गये थे कि, वह कठिनतासे बन्दूकका घोड़ा दबा सकता था। अन्तमें वह डायन उसके शिरपर पहुँची उसने बन्दूक चलाई। प्रातःकाल लोग आये तो देखा