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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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कि, वह अचेत पड़ा है उसकी बन्दूक फट गई है गर्दनकी हड्डी टूट गई है । एक बहुत बड़ा बगुला मरा पड़ा है उसकी देहमें गोली इस पारसे उस पार निकल गई है । उसके समीप ही मृत बगुले को पड़ा देख कर लोगोंको निश्चय होगया कि, यह बगुला जादूगरनी स्त्री ही है ।

निष्कर्ष — इसी प्रकार सहस्रों सिद्ध साधु ऋषि मुनि तथा राक्षस जादूगर इत्यादि पशु पक्षी और हिंसक पशुओंके स्वरूपमें फिरते रहते हैं । इसमें उनको कोई नहीं पहचान सकता । जो जाने सो ही पहचाने, दूसरेका कुछ वश नहीं चल सकता । यह बात विद्या तथा मन्त्रोंके द्वारा प्राप्त हो सकती है यह केवल एक सिद्धि है दूसरा कुछ नहीं है । सिद्ध पशुके स्वरूपमें होकर अपना काम बनाकर पृथक हो जाते हैं । जैसे शेर बन गये अपने वंशीको मार लिया । लोगोंने जाना शेरने मारा है आप अलगके अलग बने रहे ।

अन्तर्धान होना — एक साधुने मुझसे कहा था कि, एक कोढ़ी मनुष्यकी चारपाईके सिरानेके दाहने पायेको पकड़कर एक बिल्ली खड़ी थी । उसने उसको बहुत हटाया पर नहीं हटी । वह पत्थर लेकर मारने दौड़ा । वहाँसे थोड़ी दूर पर एक बांसोंकी कोठी थी वह बिल्ली उधरको ही भाग गई । कोढ़ी उसके पीछे दौड़ा । बिल्ली बांसोंकी कोठीसे तीन चार हाथके अन्तर पर ही अन्तर्धान हो गई । चाँदनी रात थी गर्मियोंका दिन था । उसको बहुत दूँढ़ा पर पता न चला । यह डुमराव इलाकेके नाट नामक गांवकी बात है ।

विज्जू ।

एक प्रकारका जीव होता है । यह भारत वर्षमें कवरिस्तानोंके पास अधिकता से पाया जाता है यह गड़े मुर्देको निकाल कर खाया करता है इसका कद बिल्लीके कदसे कुछ ही बड़ा होता है यह पेड़पर चढ़कर चील्होंके बच्चोंको भी खाजाता है ।

विज्जूओंका परस्पर प्रेम — फ्रांस देशमें दो मनुष्य यात्रा कर रहे थे उनके साथ एक कुत्ता भी था, उस कुत्तेने विज्जूको उठा दिया उन मनुष्योंमेंसे एकने उसे बन्दूकसे मार दिया । वे उसको घसीटकर गांवले चले । थोड़ी दूर चले थे कि, पीछेसे एक दुखी विज्जूका करुण शब्द सुनाई दिया । वो निडर होकर मृत विज्जू के ऊपर चढ़ गया लोग उसे हटानेकी चेष्टा करने लगे पर प्रेमके दीवाने विज्जूने अपने जीवनका मोह छोड़ रखा था उसे सिवा अपने प्यारे बीजूके दूसरा कुछ भी नहीं दीखता था जब अनेक प्रकारकी कोशिशें करनेपर भी उसने मृत विज्जूको न छोड़ा तो पाषाण हृदय शिकारियोंने अपनी भयंकर बीभत्सना परिचय देकर उसे भी मार डाला । सहृदय संसारने मानवी वंबरताका दृश्य देख दुखीके प्रेमपर दो आंसू बहा दिये । बीजू प्रेमपर विशुद्ध बलि करके सबाके लिये अमर हो गया ।