कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextदोषोंके कारण वह अब सत्यपुरुषका दर्शन नहीं पाता है। सत्यलोकके सपीप तंक तो वह चला जाता है, परन्तु सत्यपुरुषके सम्मुख वह हो नहीं सकता, सामने जानेकी शक्ति उसमें नहीं है।
जब निरञ्जन तथा अद्या अनन्त कालतक सुख संभोग करते रहे तत्पश्चात् ऐसा हुआ कि, जो निरञ्जन कर्मजीके तीन शिर काटकर खा गया था उन तीनों शिरोंके प्रभावसे तीन पुत्र उत्पन्न हुए।
बारहवाँ प्रकरण
तीनों देवोंके प्राकट्यका वर्णन
अद्या गर्भवती हुई और उससे तीन पुत्र उत्पन्न हुए। बड़ा बेटा ब्रह्मा था रजोगुणरूप हुआ, दूसरा बेटा विष्णु था जो सत्त्वगुणरूप उत्पन्न हुआ, तीसरा शिव तमोगुणरूप उत्पन्न हुआ। जिस समय यह तीनों पुत्र उत्पन्न हुए, उस समय निरञ्जन शून्यस्वरूप बनकर शून्यमें समा गया और उन पुत्रोंको पितका दर्शन नहीं मिला। उनको इस बातकी तनिक भी सुधि नहीं हुई कि, उनका पिता कौन है? निरञ्जने अद्यासे कह दिया था कि, वह उसका हाल उसके पुत्रोंसे न कहे उनके पूछने परभी वह उन्हें कदापि न बतावे। क्योंकि, वे अनेक उपाय करेंगे तथापि उसका दर्शन न पावेंगे। इस विषयमें अद्याको बारम्बार सचेत करके निरञ्जन शून्यस्वरूप होकर शून्यमें अन्तर्धान हो गया। तीनों पुत्र अपने पितासे पूर्णतया अनभिन्न रहे। तीनों भाई अत्यन्त बलिष्ठ प्रभावशाली तथा सुन्दर हुए। इन तीनों देवताओंकी उत्पत्ति मथुरापुरीमें हुई। जब ये तीनों भाई बडे हुए तथा उन्हें ज्ञान हुआ और अपने पिताको नहीं देखा; तब उन्होंने अपनी मातासे पूछा कि, "जननी! हमारे पिता कहाँ हैं, तथा कौन हैं?" तब अद्याने उत्तर दिया बेटो! मैं ही तुम्हारा पिता हूँ, तथा मैंही तुम्हारी माता हूँ, तुम्हारे तथा मेरे अतिरिक्त और दूसरा कोई नहीं; तुम्हीं मेरे पति हो और मैंही तुम्हारी पत्नी हूँ, मैंही तीनों लोककी रचने वाली हूँ, दूसरा कोई नहीं। ग्रंथ कबीर बीजकके आरंभकी रमनीमें लिखा है :-
तब ब्रह्मा पूछल महतारी। को तोर पुरुष तू काकारि नारी ॥
उत्तर-
तुम हम हम तुम और न कोई। तुमहिं मोर पुरुष हमहिं तोर जोई॥
जब माताने ऐसा उत्तर दिया कि, मैं ही तुम्हारा पिता और मैं ही तुम्हारी माता हूँ, तुम मेरे पति हो और मैंही तुम्हारी पत्नी हूँ। यह बात सुन-