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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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कर तीनों भाई तीनोंअप्रसन्न हुए और विचार किया कि, उनकी माता मिथ्या वचनोंसे उनको बहकाती है, उसकी बातें विश्वास करनेके योग्य नहीं है। इस प्रकार तीनों भाइयोंने उसको मिथ्यावादिनी समझकर मौन धारण करलिया ।

तेरहवाँ प्रकरण

चारों वेदोंके प्राकट्यका वर्णन

जब निरञ्जनजी शून्यमें जाकर शून्य समाधि लगा बैठे तथा अपनी योग समाधिमें आत्मविस्मृति कर गये, तब आपके श्वासके मार्गसे चारों वेद निकल पड़े। निरञ्जनने जो स्वसंवेदसे सूक्ष्म बातोंको चुनकर अपने हृदयमें रक्खाथा और उसमें अपने विचारोंको भी मिला दिया था; सो चारों वेद उनके श्वाससे बाहर निकल पड़े। कबीर साहबने ग्रंथ मुहम्मद बोध तथा स्थान २ पर लिखा है कि; ये चारों वेद स्वसंवेदके त्वचा ज्ञानसे बने हैं। त्वचा अर्थात् चाम त्वचा ज्ञान अर्थात् मोटा ज्ञान निदान ये चारों वेद स्वसंवेदक मोटे (बाहरी) ज्ञानसे बने हैं, इनकी बातें उत्कृष्ट हैं सर्वोत्कृष्ट नहीं इनमें सब मोटी २ बातें हैं, अतिनिर्मल तथा अत्यंत पवित्र बातोंसे नितान्तही अनभिन्न हैं। ये चारों वेद स्वसंवेदसे इस प्रकार निकल पड़े जैसे श्वेत घृत द्वारा काला काजल प्रगट होता है—अथवा जिस प्रकार आकाशसे वृष्टिका जल स्वच्छता तथा पवित्रतासे आता है किन्तु, वह पृथ्वीपर गिरकर उसका रङ्ग ढङ्ग और ही हो जाता है और गँदला तथा अपवित्र बन जाता है, उसके गुण भिन्न २ प्रकारके होते हैं। इसी प्रकार इन चारों वेदोंने काल पुरुषके विचारोंकी संश्लिष्टताके कारण, अपने पिता सूक्ष्म वेदसे निरालाही ढङ्ग धारण कर लिया, तथा अपने पूज्य पिताके ढङ्गोंको छोड दिया। स्वसंवेद पवित्र स्वच्छ, निर्गुण तथा निष्कलंकित है। इसके चारों पुत्र जो अब ऋग्वेद—यजुर्वेद—सामवेद तथा अथर्ववेदके नामसे प्रख्यात हैं—वे निरञ्जनके संसर्गसे दूषित हो गये हैं।

चौदहवाँ प्रकरण ॥ १४ ॥

वेदकी उत्पत्ति प्रथम अक्षरपुरुषसे

कबीर साहबने कहा है (कबीरवाणी इत्यादि ग्रन्थोंमें लिखा है) कि, अक्षर पुरुषके चार अंश हैं, इन चारोंमेंसे एकने जिसका ज्ञान अल्प तथा न्यून था—उसीने यंत्र मंत्र और वेद बनाये। उसी अक्षरपुरुषके इन्हीं चारों अंशोंमें एक अंश निरञ्जन है, अतः इस वेदकी उत्पत्ति पहले अक्षरपुरुषसे है,