कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextप्राप्ति नहीं होती तबतक मनुष्य अन्य २ धर्मोंमें प्रवृत्त रहता है। कबीर पन्थका अधिकारी नहीं होता। जब मनुष्यके अंतःकरणसे भली प्रकार मल विक्षेप आदि दोष दूर हो निर्वासना पदको प्राप्त करे तबही कबीर पन्थका आधिकारी होता है।
८७ प्रश्न—पश्चिमीयोंके घृणितोंके ग्रहणका कारण, पश्चिमीय नबी और पैगम्बर आदि धर्माचारियोंने मद्यमांसादि घृणित पदार्थोंका निषेध क्यों नहीं किया ?
उत्तर—पश्चिमीय धर्मोपदेशक लोग स्वयम् मद्य मांसके ग्रहण करनेवाले थे। इसमाईल और इब्राहीम आदि नबी प्रसिद्ध शिकारी थे। जिकियाका पुत्र योहन टिडियोंको मार मार कर खाता था।
८८ प्रश्न—कबीर साहबके विषयमें तो किसी नबीने भविष्यत् नहीं कहा ?
उत्तर—एक लाख अस्सी सहस्र पैगम्बर भविष्यत वादी हुये वे सब निरञ्जनके पुत्र उसीके लोककी सुधि जानते थे। उन्हें सत्य लोककी क्या खबर थी ? उसके बिना उसका समाचार। कौन कहसक्ता है ? जो हंस कबीर उसकी सुधि जानते हैं वे सर्वदा उसकी स्तुति और प्रार्थना करते रहते हैं।
पृथ्वीका निरूपण।
८९ प्रश्न—पश्चिमीय विद्वानोंका मत है कि, पृथ्वी चलती है और गोल है सो सत्य है कि, नहीं ?
उत्तर—निस्सन्देह पश्चिमीय विद्वानोंका मत है यही बरन कितनेही भारतवासी, जो नबीन शिक्षाके पक्षपाती हैं, वैसाही विचार रखते हैं। जिस प्रकार भारतके विद्वानोंके इस विषयमें भिन्न भिन्न मत हैं वैसेही योरोपिय विद्वानोंके भी मत हैं। क्योंकि, कितने विद्वान् लोग पृथ्वीको स्थिर मानते हैं। योरोपियन लोगोका यह कहना है कि, हम सच्चे और भारतवासी झूठे हैं, महान तुच्छ और असत्य है।
तौरत और इञ्जील आदिकमें तो इस विषयमें कुछ तो लिखा ही नहीं है पर पश्चिमीय विद्वानोंने केवल अपने अनुमान और कल्पनासे कुछ कुछ लिखा है।
(१) वे (योरोपियन्स) कहते हैं कि, पृथ्वी गोल है। इसमें कोई विवाद नहीं क्योंकि, भारतीय विद्वान्, भी पृथ्वीको गोलही कह गये हैं।
(२) योरोपियन्स कहते हैं कि, पृथ्वी चलती है। पृथ्वीकी गतिको प्रमाणित करनेके लिये कुछ क्षुद्र युक्तियाँ भी प्रकाशित करते हैं। जैसे—नदीमें