काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)
Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीहरिः ॥
श्रीरामायण-महाभारत
काल-मीमांसा
( खण्ड १ )
कुछ पाश्चात्त्य विद्वान् और उनके अनुयायी कतिपय भारतीय विद्वान् भी
महाभारत के पात्र युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन आदि को ऐतिहासिक पुरुष न
मानकर काल्पनिक मानते हैं । एवं महाभारत के युद्ध को प्रत्येक पुरुष के मन में
उठनेवाली दैवी-आसुरी वृत्तियों का युद्ध अथवा धर्म-अधर्म का युद्ध मानते हैं ।
इससे वे यह कहना चाहते हैं कि महाभारत कोई इतिहास नहीं है । किन्तु
ऐसा मानने में उन लोगों के पास कोई प्रमाण नहीं है । हम आगे उन्हीं
प्रमाणों का सङ्कलन करने जा रहे हैं जो उनकी ऐतिहासिकता के पोषक हैं ।
ऐतिहासिकता के पोषक प्रमाण—
प्रतिदिन प्रातः स्मरण में उन लोगों का स्मरण ही यह बतलाता है कि वे
ऐतिहासिक हैं ।
धर्मो विवर्धति युधिष्ठिरकीर्तनेन ।
पापं प्रणश्यति वृकोदरकीर्तनेन ॥
शत्रुर्विनश्यति धनञ्जयकीर्तनेन ।
माद्रीसुतौ कथयतां न भवन्ति रोगाः ॥'
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