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जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)

by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक

Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)

DevanagariHindipublished479 pages

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१२५. कटाहक जातक

“बहुम्पि सो विकत्थेय्य . ” यह (धर्मोपदेश) शास्ता ने जेतवन में
विहार करते समय एक शेखी बघारने वाले भिक्षु के बारे में कहा। उसकी
कथा पूर्वोक्त सदृश ही है¹।

ख. अतीत कथा

पूर्व समय में वाराणसो में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व
महाधनशाली सेठ हुए। उसकी भार्या ने पुत्र को जन्म दिया। उसकी
दासी ने भी उसी दिन पुत्र उत्पन्न किया। वे दोनो साथ साथ बढ़ने लगे।
सेठ के लड़के के लिखना सीखते समय, दास ने भी उसकी तख्ती ढोने हुए जाकर
उसी के साथ लिखना सीखा, गिनना सीखा। दो तीन भाषाएँ (बोहार)
सीखी। क्रम से बढ़कर वह वचन-कुशल, भाषाविद, सुन्दर तरुण हुआ।
उसका नाम था कटाहक।
सेठ के घर में भण्डारी का काम करते हुए वह सोचने लगा कि यह लोग
मुझसे हमेशा भण्डारी का काम नहीं लेंगे। कुछ भी दोष देखेंगे, तो डाटेंगे,
बांध कर दाग देगे और दास बनाकर काम लग। इलाके मे सेठ का मित्र एक
सेठ है। क्यो न मैं सेठ की तरफ से एक चिट्ठी लेकर, वहाँ पहुँच 'मैं सेठ का
लडका हूँ कह उस सेठ को धोखा दे, उसकी लड़की से शादी कर सुखपूर्वक
रहूँ।
उसने कागज ले उस पर अपने ही लिखा—मैं अमुक नाम का (सेठ)
अपने पुत्र को तुम्हारे पास भेजता हूँ। मेरा तुम्हारे ओर तुम्हारा मेर साथ


¹ भीमसेन जातक (८०)।