जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
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Read in contextनङ्गलीस ] ५१
राजा बोला—'तात ! यहाँ आकर तूने अच्छा किया।' फिर प्रसन्न
हो नगर सजवा हाथी को मगल-हाथी घोषित किया। सारे नगर के तीन हिस्से
कर, एक हिस्सा बोधिसत्त्व को दिया, एक हथवान् को और एक स्वयं लिया।
बोधिसत्त्व के आने के समय से ही सारे जम्बूद्वीप का राज्य राजा को हस्त-
गत हो गया। वह जम्बूद्वीप का महाराज हो दान आदि पुण्य कर्म कर धर्मानुसार
परलोक सिधारा।
शास्ता ने यह धर्म-देशना ला जातक का मेल बैठाया।
उस समय मगध नरेश देवदत्त था। वाराणसी का राजा सारिपुत्र था।
हथवान आनन्द था। और हाथी तो मैं ही था।
✓ १२३. नङ्गलीस जातक
“असब्बत्यगामिं वाच” यह (धर्म देशना) शास्ता ने जेतवन में विहार
करते समय लालुदायि स्थविर के बारे में कही—
क. वर्तमान कथा
वह धर्मोपदेश देते समय यहाँ यह कहना चाहिए, यहाँ यह न कहना चाहिए,
योग्य अयोग्य नही जानता था। मङ्गल (बात) कहने की जगह अमङ्गल
बात कहकर (दान-) अनुमोदन करता था, जैसे तिरोकुड्डेसु तिट्ठन्ति सन्धि-
सिङ्घाटकेसु च¹। अमङ्गल अनुमोदन करने की जगह बहू देवा मनुस्सा च
¹ तिरोकुड्ड सुत्त, खुद्दकपाठ (खुद्दक निकाय) की पहली पंक्ति जिसका
मतलब है कि प्रेत लोग आकर दीवारों के बाहर, खिडकियो में और चौरस्तो
में खडे होते हैं।