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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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अपनी प्रयोगशाला में बैठा है। उसके सामने एक मेज पर बार्यों और अनेक टी-बी के कीटाणुओं की प्लेटें रखी हुई हैं। बीच में अनेक प्रकार की औषधियों की शीशियाँ रखी हैं। दायीं ओर वह प्लेटें रखी हैं जिन पर टी-बी के कीटाणुओं की प्लेटों पर परीक्षा के लिए औषधियाँ लगी हैं। डा० का आदेश था कि उसकी प्रयोगशाला में कोई भी न आये केवल उसकी पत्नी ही आ सकती है। वह भी बिना किसी आहट के, समय पर चाय आदि रख जाय। एक दिन ठण्ड अधिक पड़ रही थी। डा० की पत्नी चाय देने के लिए प्रयोगशाला में गई उसने बार्यों और पास में रखी अंगीठी पर चाय की कोतली रख दी और चमचे से कोतली में चीनी डालने लगी। ठण्ड के कारण से हाथ काँप गया और थोड़ी सी चीनी आग में जा गिरी अंगीठी से धूम उठने लगा वह डर के कारण शीघ्र ही भाग आया। इसी बीच डा० एक प्लेट को औषधि लगा रहा था उसने प्लेट को औषधि लगाकर दायीं ओर रखी और बार्यों ओर से दूसरी प्लेट उठायी ज्योंही उसने उस प्लेट पर औषधि लगाने को हुआ तो उसने देखा कि उस प्लेट के कीटाणु मरे हुए हैं। वह एकदम चकराने लगा और कहने लगा यह कैसे मरे जबकि इन कोई भी औषधि नहीं लगाई गई, उसने देखा बार्यों ओर जितनी प्लेटें रखी थीं उन सभी प्लेटों के कीटाणु मर गये थे। उसका ध्यान अंगीठी से उठते धूम पर गया उसने औषधि लगी प्लेट को उड़ाया और अंगीठी से उठते हुए धूम से लगाया प्लेट को धूम लगते ही उसके कीटाणु मर गये। उसने उसी समय पत्नी को बुलाया। वह घरवा उठी। डा० ने पूछा कि तुमने अंगीठी में क्या डाला है घरवाओ मत सही-सही बताओ तब उसने सही बात कह दी। डा० ने पुनः अपने हाथ से चीनी अंगीठी की आग पर डाली और जीवित कीटाणुओं की प्लेटों को उसका धूम लगाया धूम के लगने से सारे कीटाणु मर गये। डा० ने उसी समय घोषणा की कि यह रोग भारत में नहीं होता क्योंकि भारत के पूर्वजों ने पहले

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri