इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in context‘किशमिश, मुनक्का और मिश्री’ इन तीनों में से एक या तीनों ही तथा गुगल और चन्दन धूरा मिलाकर आंगन मे डालने से अनेक रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करके वायु को शुद्ध करता है।
जिस समय भारतवर्ष के प्रत्येक परिवार में दैनिक यज्ञ करने की प्रथा थी उस समय हमारा देश इतने रोगों से प्रसित न था जितना आज है। यज्ञ से वायु शुद्ध होकर रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करके आरोग्यता प्रदान करती है। हे भारतवासियों अपने पूर्वजों के नियमों को अपनाओ और भारत को रोग रहित तथा हष्ट-पुष्ट बनाओ।
“धुएँ के लाभ दिखलाते हुए फ्रांस के विज्ञानवेत्ता अध्यापक ट्रिलवर्ट कहते हैं कि जलती हुई शक्कर में, वायु शुद्ध करने की बहुत बड़ी शक्ति है। उन्होंने इसके प्रयोग भी दिखलाये हैं। वे कहते हैं कि इससे क्षय, चेचक, हैजा आदि बीमारियाँ तुरन्त नष्ट हो जाती हैं। इसी तरह डा॰ एम॰ ट्रेल्ट ने मुनक्का, किशमिश आदि फलों को (जिसमें शक्कर अधिक होती है) जला कर देखा है। उनको मालूम हुआ है कि उनमें धुएँ से टाइफाइड के रोगकीट ३० मिनट में और दूसरे रोगों के कीट घन्टे दो घन्टे में नष्ट हो जाते हैं। मद्रास के सेनेटरी कमिश्नर डाक्टर कर्नल किंग आई॰एम॰एस॰ ने कालेज के विद्यार्थियों को उपदेश किया है कि घी और चावल में केसर मिलाकर जलाने से रोग जन्युओं का नाश हो जाता है। फ्रांस का डाक्टर हैफकिन कहता है कि घी के जलाने से रोगकीट मर जाते हैं। इन प्रमाणों से पाया जाता है कि विचारपूर्वक स्थिर किये हुए रोगनाशक पदार्थों के धुएँ से लाभ ही होता है।”
वैदिक सम्पत्ति प्रकरण हवन और वैज्ञानिक शंका अमरीका के एक डा॰ ने टी॰बी॰ के कीटाणुओं के नष्ट करने के लिए औषधि खोज निकालने का निश्चय किया। वह इच्छानुसार सन्तान ५१ वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri