Skip to content
SarvaKosh
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

Page 220 of 250

Read in context
Page 220

३२-अश्वघ (पीपल) के पके फलों को छाया में सुखाकर चूर्ण कर लें। समान भाग मिश्री मिलकर ३ माशा प्रातः, सायं, दूध से लें तो वीर्य पुष्ट हो तथा हृदय की निर्बलता को भी दूर करता है।

३३-सालब मिश्री पंजे वाली १ तोला, सफेद मूसली १ तोला, दोनों को बारीक कूट लें। इसमें १ तोला तुखेरिहॉ सफ करके साबुत ही मिला दें। इसमें से ६ माशा लेकर एक पाव दूध में घोल कर अग्नि पर पकायें। दो उबाल आने पर नीचे उतार लें और मीठा डालकर सेवन करें। इससे वीर्य गाढ़ा होकर सन्तान को जन्म देने की शक्ति वाला हो जाता है। शरद ऋतु में ७ नग बादाम की गिरी और पीसकर मिला लें। ३४-१ पाव चुने को ४ सेर जल में मिलाकर मिट्टी के पात्र में रखें। २४ घण्टे में ४, ५ बार लकड़ी से चला दें। बाद में नितार कर साफ जल निकाल लें।

उपरोक्त चूने का साफ जल २सेर, बायबिडुंग १ छटीक, भारगी १ छटीक, सौफ २ तोला, कासनी २ तोला, दूधिया बघ २ तोला, जायफल २ तोला, अतीस २ तोला। सबको २४ घण्टे भिगोकर पकाएँ चौथाई जल रहने पर छान लें और ३ छटीक चीनी डालकर शर्बत बनालें। यह बच्चों को जल में या दूध में घोलकर देने से बच्चों के हरे पीले दस्त, दूध डालना आदि सभी रोगों को नष्ट करके बच्चों को हृष्ट-पुष्ट करता है।

३५-सुहागा चौकिया की खील १ तोला, नौसादर देसी ॥ तोला, काली मिर्च ॥ तोला, सब का चूर्ण बना लें। यह चूर्ण बच्चों के जिगर, तिल्ली, अपच, अफारा आदि रोगों में लाभदायक है। बड़े व्यक्तियों को भी लाभप्रद है।

३६-चूने का जल ४ माशा बच्चों को देने से, बच्चों की हड्डी आदि दृढ़ होती है। एक छटीक चूने को १॥ सेर जल में

इच्छानुसार सन्तान

२१४

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri