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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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सायं ऊष्ण दूध से स्त्री को देने से प्रदर कमर दर्द, गर्भ स्थित न होना आदि रोगों को दूर कर स्त्री स्वस्थ और सुन्दर बनती है। २८-२ तोला सफेद सुर्मे की डली लेकर अनि में गर्भ करके आधा पाव अर्क गुलाब में बुझाओ तथा बार बार सुर्मे को गर्भ करके बुझाते रहो यही तक बुझाओ कि सारा अर्क समाप्त हो जाय फिर उस सुर्मे को खरल में घोटकर रख लो। एक माशा प्रातः, एक माशा सायं मक्खन या मलाई में देने से प्रदर रोग ठीक होता है।

२९-श्याम तुलसी का १ पत्ता साबुत निगल लें और नित्य एक पत्ता बढ़ाते जायें। ४०वें दिन ४० पत्ते निगल कर अगले दिन से एक पत्ता घटाते जायें। यह श्याम तुलसी का ८० दिन का कल्प है। इससे शरीर रोग रहित होकर पुष्ट होता है, बल, वीर्य बढ़ता है। ध्यान रहे तुलसी पत्र को दौतों से नहीं चबाना चाहिए, क्योंकि इसमें पारद होता है और पारद दौतों को हिला देता है। इसलिये सम्भव है तुलसी पत्र दौत से चबाने पर दौत हिल जायें।

३०-जलजमनी के सूखे पत्ते १ पाव, हर छोटी घी की भुनी १छटीक, मिश्री ५ छटीक सबका चूर्ण कर लें। ८ माशा प्रातः, ८ माशा सायं दूध से लेने पर स्वप्न दोष, निर्बलता, शीघ्र पतन आदि को दूर करता है।

३१-बानरी गुटक- १ पाव काँच के बीजों को काटकर छिलका अलग करके कूटें। १ सेर गाय के दूध में डालकर पकायें जब पकते-पकते हलुआ जैसा हो जाय तो उतार कर बड़े बेर की बराबर गोली बना लें इन गोलियों को गाय के घी में तल कर आधा सेर चीनी की चासनी में डालते जायें। जब चीनी चढ़ जाये तो गोलियाँ निकाल कर किसी चीनी या शीशे के पात्र में रख लें और उसमें ऊपर तक असली मधु भर दें। प्रातः सायं बल के अनुसार सेवन करें। इसके सेवन से वीर्य के समस्त दोष दूर होकर प्राकृतिक सन्तन्मन होता है।

इच्छानुसार सन्तान २१३ वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri