इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextभिगो दें। ३, ४ बार चला दें जल टिक जाने पर नितार लें। फिर ४-५ बार कपड़े में छान कर साफ कर लें। यही चुने का जल है।
३७-सोये का अर्क भपारे से निकाला हुआ ॥ तोला दोनों समय बच्चों को देने से बच्चों के सामान्य समस्त रोगों को नष्ट करके स्वस्थ करता है।
३८-पुष्प नक्षत्र में शंख पुष्पी को उखाड़ कर छाया में सुखा लें। यह शंख पुष्पी १ तोला, सत गिलोय ३ माशा, दोनों को मिलाकर कूट छान कर चूर्ण कर लें। यह चूर्ण २ से ४ रंती तक बच्चों को ४ वर्ष की आयु से देना चाहिए।
लाभः- इसके सेवन से बच्चों की बुद्धि स्थिर होकर पढ़ने में रुचि होती है और कण्ठस्थ करने की शक्ति बढ़ती है।
३९-१ रंती स्वर्ण भस्म, ३माशा बंसलोचन अलसी में मिलाकर खरल कर लें। इसकी २० पुड़िया बना लें, एक पुड़िया नित्य मधु, मक्खन या मलाई से २० दिन बराबर दें। बचपन में प्रति वर्ष शरद ऋतु में बच्चों को सेवन करा दिया जावे तो उसकी रोग निरोधक शक्ति बढ़ती है और कोई मर्याकर रोग सहसा आक्रमण नहीं करता। बल बुद्धि को बढ़ाता है।
४०-१ तोला काली मिर्च, २ तोला जीरा भुना हुआ, ३ तोला नौसादर देशी, ३ तोला सेंधा नमक, १॥ माशा हाँग भुनी हुई, ३ माशा टाटरी। सबको कूट कर चूर्ण कर लें। यह स्वादिष्ट और हाजिम है।
४१-हर छोटी, बड़ी इलायची के दाने, तुम्बोरिहों, सौफ, धनियाँ, समान भाग लेकर हल्का-हल्का अग्नि पर भून लें। दरदरा कूट कर सबको बराबर बूरा मिला लें। दिन में चार बार ८-८ माशा जल से दें। इससे आँख, खून के दस्त ठीक होकर पेट ठीक हो जाता है।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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