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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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से २ दिन पूर्व भी रति न करे। ऐसा करने से उस मास में गर्भ स्थित नहीं होगा।

आपके समक्ष कुछ अभूतपूर्व एवं नवीनतम अनुसन्धानात्मक प्राकृतिक गर्भ निरोधक साधनों पर प्रकाश डालते हैं, जो अत्यन्त उपयोगी, सुलभ एवं वान्छित फल के दाता हैं, साथ में स्वास्थ्य पर किञ्चित मात्र भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं होने देते अपितु आंशिक रूप से ब्रह्मचर्य के पथ पर अग्रसर होने में सहायक सिद्ध हैं।

प्रथम साधन- हमने अपने पूर्व के साहित्य में अंकित किया है कि स्वर्गों की साधना द्वारा अपनी इच्छा के अनुरूप पुत्र एवं पुत्री को प्राप्त किया जा सकता है, क्योंकि शरीर के साथ-साथ वीर्य पर भी स्वर्गों का सीधा प्रभाव पड़ता है।

आप सभी जानते हैं कि बिजली को उपयोग में लाने के लिए दो प्रकार के तारों का प्रयोग होता है। 'निगेटिव और पोजिटिव' एक गर्म तार और दूसरा ठण्डा तार। प्रकाश करने अथवा बिजली के यन्त्र को क्रिया में लाने के लिये इन दोनों ही तारों का प्रयोग होता है। यह असम्भव है कि दोनों तार गर्म हों और प्रकाश हो जाये। इसी प्रकार दोनों तार ठण्डे होने पर भी प्रकाश नहीं हो सकेगा। प्रकाश तो तभी होगा जब एक तार गर्म और दूसरा तार ठण्डा हो।

चुम्बक पत्थर (मैग्नेट) के दो ध्रुव होते हैं। पहला उत्तरी ध्रुव दूसरा दक्षिणी ध्रुव। आप दो चुम्बक पत्थर ले लीजिए, इन दोनों के उत्तरी ध्रुवों को आपस में मिलायें आप देखेंगे की दोनों आपस में मिलने की अपेक्षा दूर भागते हैं। इसी प्रकार दोनों के दक्षिणी ध्रुवों को मिलाने पर भी दूर भागेंगे। यह दोनों आपस में तब मिलेंगे जब एक के उत्तरी ध्रुव और दूसरे के दक्षिणी ध्रुव को मिलाया जाय तब आप देखेंगे कि वह पीछे भागने की अपेक्षा आपस में दौड़कर मिलेंगे।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri