इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextसन्तति निरोध के लिये ३५ वर्ष की आयु के पश्चात् ही उपाय करना चाहिए। परन्तु आजकल इसका उलटा हो रहा है। और इस कृत्रिम सन्तति निरोध ने व्यभिचार को इतना बढ़ा दिया है कि जिसकी सीमा नहीं रही।
महात्मा गांधी ने एक लेख में लिखा था—
“इन कृत्रिम साधनों से ऐसे-ऐसे कुपरिणाम आये हैं, जिनसे लोग बहुत कम परिचित हैं। स्कूली लड़के और लड़कियों के गुप्त व्यभिचार ने क्या तूफान मचाया है, यह मैं जानता हूँ। मैं जानता हूँ, स्कूलों में कालिजों में ऐसी अविवाहिता जवान लड़कियाँ भी हैं जो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कृत्रिम सन्तति निग्रह का साहित्य और मासिक पत्र बड़े चाव से पढ़ती रहती हैं और कृत्रिम साधनों को अपने पास रखती हैं। इन साधनों को विवाहित स्त्रियों तक ही सीमित रखना असम्भव है और विवाह की पवित्रता तो तभी लोप हो जाती है जब कि उसके स्वभाविक परिणाम सन्तानोत्पत्ति को छोड़ कर महज अपनी पाशविक विषय वासना की पूर्ति ही उसका सबसे बड़ा उपयोग मान लिया जाता है।”
इससे यह सिद्ध हो जाता है कि मनुष्यों के हृदय में कृत्रिम सन्तति निग्रह के इस आन्दोलन से पवित्रता के स्थान पर किस प्रकार निम्न कोर्ट की कामुकता का आधिपत्य हो रहा है और किस प्रकार हमारे अपरिपक्व मति बालक और बालिकायें इसके शिकार होकर अपना सर्वनाश कर रहे हैं।
सन्तति निरोध का सबसे बढ़िया साधन एक मात्र इन्द्रिय संयम है।
हम पिछले पृष्ठों में लिख आये हैं कि स्त्री के मासिक धर्म से १६ दिन तक ही समागम करने पर गर्भ स्थित हो सकता है, इसके पश्चात् नहीं, इसलिये मासिक धर्म के दिन से १८ दिन तक स्त्री समागम न करे। और अन्त में मासिक धर्म प्रारम्भ होने
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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