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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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आप ठण्डे पानी में एक ठण्डा ही लोहे का गोला डालकर देखें, कोई भी प्रतिक्रिया नहीं होगी। इसी प्रकार पानी और लोहे के गोले को एक सी ही डिग्री पर गर्म करके मिलाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं होगी। इसमें प्रत्यक्ष प्रक्रिया तब होगी जब पानी ठण्डा और लोहे का गोला गर्म हो।

इस प्रकार रति के समय स्त्री-पुरुष दोनों के गर्म तार हों तो गर्भ स्थित नहीं होगा और न ही दोनों के ठण्डे तार होने पर गर्भ स्थित होगा। गर्भ स्थित तभी हो सकेगा जब एक का गर्म तार हो और दूसरे का ठण्डा।

वेद में कहा है:-

गन्धर्वो अस्वप्या च योषा सानौ।

नाभिः परम जाभि तन्नी॥

अथर्ववेद १८/१/४ ऋग्वेद १०/१०/४

गन्धर्व अर्थात् पुरुष जलीय परमाणुओं से युक्त हो और स्त्री भी जलमयी हो अर्थात् स्त्री और पुरुष अग्नि और जल के स्वभाव से युक्त न होकर दोनों एक ही प्रकृति के हों तो वही हम दोनों में बड़ा दोष है जो सन्तान उत्पन्न होने में बाधक है।

अब यह प्रश्न उठता है कि मनुष्य शरीर में गर्म और ठण्डा तार क्या है। शरीर में गर्म और ठण्डा तार नासिका स्वर हैं। नासिका के दायें स्वर चलने को गर्म तार कहते हैं और नासिका के बायें स्वर चलने को ठण्डा तार कहते हैं। रति समय स्त्री-पुरुष दोनों के दायें स्वर चलते हैं तो गर्भ स्थित नहीं होगा। इसी प्रकार रति समय दोनों के बायें स्वर चलते हैं तो भी गर्भ स्थित नहीं होगा गर्भ स्थित उसी अवस्था में होगा, जब रति समय एक का बायाँ और दूसरे का दायाँ स्वर चल रहा हो। आप कहेंगे कि स्त्री-पुरुष दोनों ही प्राकृतिक रूप से गर्म और ठण्डे तार हैं, क्योंकि स्त्रियों में ऋणात्मक और पुरुषों में घनात्मक विद्युत शक्ति

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri