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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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आश्रम व्यवस्था में पूर्ण आस्था रखते हैं। तो आप ५५ वर्ष की आयु में वानप्रस्थ लेंगे तो उस समय आपका सबसे छोटा बच्चा १५ वर्ष का होगा, जो हर प्रकार अपने को संभाल सकता है और यदि कहीं आपने ४८ या ५० वर्ष की आयु में किसी बच्चे को जन्म दिया तो आप स्वयं ही समझ लें कि उस बच्चे की क्या दशा होगी। मेरे स्वयं देखने में आया है कि पुरुषों ने ६५ वर्ष की आयु में कन्या को जन्म दिया और जन्म देने के पश्चात् उनका स्वास्थ्य इतना थक गया कि वह धनोपार्जन नहीं कर सकते। यह उनका उस कन्या के प्रति अन्याय नहीं तो और क्या है। ६६ वर्ष के आप हैं कन्या १ वर्ष की है वह किसके आसरे पलेगी, कौन उसे शिक्षा दिलायेगा और कौन उसका विवाह करेगा। आज पुत्र सर्विस कर रहा है और आपको भी कुछ धन दे रहा है, यदि कल को उसके भी २,३ बच्चे हो गये तो वह आपको देगा या अपने परिवार का पोषण करेगा। उस समय आप सोचेंगे कि मैंने काम के वशीभूत होकर यह क्या किया। इसीलिये सन्तान को ४० वर्ष की आयु के पश्चात् कभी जन्म न दें।

आज जो सन्तति निरोध का प्रश्न उठा है वह भारत की निर्धनता, अन्न की कमी या भूमि की कमी के कारण नहीं परन्तु इन इन्द्रियों में लिप्त कामी, विषयी पुरुषों के कारण उठा है। जब भारतवर्ष में सन्तति के सम्बन्ध में पूरा ध्यान रखा जाता था उस समय दस मास बच्चे के गर्भ में रहने के, दस मास बच्चे के दूध पीने के और दस मास स्त्री को अपना स्वास्थ्य ठीक करने के लिये छोड़ते थे अर्थात् २१। वर्ष के पश्चात् जब स्त्री पुरुष पुष्ट होते थे तो दूसरी सन्तान के लिए समागम करते थे।

जो वीर्य २१। वर्ष तक शरीर के मध्य समस्त इन्द्रियों द्वारा तप्त होकर कूटनमय बन जाता था, तब उस वीर्य से जो सन्तान होती थी वह भी अनुपम होती थी।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri