इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextमें ऐसे भी मनुष्य होते हैं?
ऋतुमति स्त्री चौथे दिन स्नान के पश्चात् तत्काल ही जैसे भाव तथा चित्र और पुरुष के दर्शन करेगी तो उस मास में गर्भ स्थित होने पर वैसे ही रंग, रूप विचार और भाव बच्चे में आ जाते हैं। यदि वीर पुत्र चाहे तो वीर योधाओं के चित्र धर्मात्मा पुत्र की इच्छा में महात्माओं के चित्र, रूपवान पुत्र प्राप्त करने के लिए सुन्दर बच्चों के चित्र और विद्वान पुत्र के लिए लेखकों आचार्यों तथा गुरुओं के चित्र देखो।
ऋतु स्नान के पश्चात् स्त्री के नेत्र छाया चित्र (फोटो कैमरा) के लैन्सों का कार्य करते हैं। उस समय जैसा चित्र तथा आकृति को नेत्र देखेंगे वैसा ही प्रतिबिम्ब मन तथा भाव में गुप्त रूप में समाविष्ट हो जाता है। जो गर्भ रहने पर अपनी आकृति में परिवर्तित कर लेता है।
रति समय वर्जित काल
स्त्रियों को स्वाभाविक ऋतुकाल की १६ रात्रि हैं। जिस दिन से ऋतु आरम्भ होता है उसी दिन से १६ रात्रि तक ही गर्भ स्थित होता है। जिसमें पहले चार दिन अच्छे मनुष्यों से निन्दित भी सम्मिलित हैं। इसलिए पहले चार दिनों में स्त्री भोग न करे।
ऋतु कालाभिगानी स्यात्स्वदारनिरतः सदा।
पर्ववर्ज ब्रजेच्छैनां तद्व्रतो रतिकाम्यया॥
मनु ३/४५
अर्थ- अपनी स्त्री से (अमावस्यादि) पर्व वर्जित दिनों को त्याग कर शेष ऋतुकाल में प्रीतिपूर्वक समागम करे।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri