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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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इसी प्रकार तुमने ऋतु स्नान के बाद दूसरी बार धुनें का तीसरी बार में भिन्नता का और चौथी बार में मेरा दर्शन किया होगा।

देवी कल शाम आर्य समाज के उत्सव में एक प्रोफेसर अमरीका का दौरा करके आये थे उन्होंने एक घटना अमरीका के एक दम्पति की सुनाई।

अमरीका के एक दम्पति को घर एक बालक ने जो हब्बी जैसा काला, सारे शरीर पर बड़े-बड़े काले बाल थे जन्म लिया। यह देखकर अमरीकन ने अपनी पत्नी से कहा- यह गर्भ मेरा नहीं। पत्नी- यह आप क्या कह रहे हैं, मैं तो कहँी भी नहीं गई। अमरीकन- तो यह बच्चा हब्बी जैसा क्यों, जबकि हम दोनों बिलकुल ही गोंरे हैं। पत्नी- यह बात मेरी भी समझ में नहीं आती। उन दिनों में अमरीका प्रचार के लिए गया था। उक्त अमरीकन महाशय अपनी शंका लेकर मेरे पास आये। मैंने उनकी शंका का समाधान करते हुए मालूम किया। क्या? आप बता सकते हैं कि आपके कमरे में कुछ चित्र लगे हैं? अमरीकन- हाँ लगे हैं। भारतीय- तो आप अपनी पत्नी से मालूम करें कि इन चित्रों में आपको कौन-सा चित्र प्रिय है और आप उसे नित्य देखती हैं, साथ में यह देखना कि सोते समय वह चित्र किस ओर रहता है और उस चित्र को लेकर आप मुझसे मिलें। अगले दिन जब वह अमरीकन चित्र लेकर मेरे पास आया तो वह चित्र भी काले हब्बी का था। मैंने अमरीकन को समझाया देखो मासिक धर्म के स्नान के पश्चात् भी यही चित्र देखा गया है और गर्भाधान के समय भी आपके कथानानुसार यह चित्र सामने रहा और जब तक बच्चे का जन्म हुआ तब तक नित्य ही इस चित्र को ध्यान पूर्वक देखा गया है जिस कारण आपके इसी चित्र के अनुसार हब्बी जैसे पुत्र का जन्म हुआ। अमरीकन ने घर जाकर पत्नी से मालूम किया तो यह सत्य निकला कि जब वह कमरे में आती थी तो उसका ध्यान इसी चित्र पर जाता था और वह सोचती थी क्या संसार

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri