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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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करे या अपने चेहरे को दर्पण में देखे।

एक बार एक पुरुष ने अपनी पत्नी से कहा कि हमारे चार पुत्र हैं, मैं इस बात की परीक्षा करना चाहता हूँ कि इनमें से मेरा पुत्र कौन-सा है इस बात को सुनकर स्त्री ने कहा नाथ क्या आपको मुझ पर सन्देह है? आप मुझ पर दोष लगाते हैं? नहीं देवी, मैं तुम पर पूरा विश्वास करता हूँ, तुम पतिव्रता हो, निर्दोष हो, पवित्र हो, मैं एक और बात का अनुभव करना चाहता हूँ, जो मैंने नई सुनी है। देखो मैं इस कोठरी में बन्द हो जाता हूँ, तुम अपने शरीर को हल्दी चूना लगा लो, बच्चे पाठशाला से आते होंगे। पूछने पर तुम उनसे कह देना कि तुम्हारे पिता ने मारा है। पहले बड़ा लड़का आया उसने भी से पूछा मैं क्या हो गया? मैं ने कहा- बेटा तुम्हारे पिता ने मारा है। लड़के ने कहा- अच्छा घर आवे तो मैं में उसे कुट्टी की तरह काट डालूँगा कहता हुआ चला गया। अब दूसरा लड़का आया उसने भी प्रश्न किया और उत्तर में कहा मैं मत घबरा बाप को घर आने देने में उसे रुई की तरह धुन डालूँगा। तीसरे लड़के ने भी आकर प्रश्न किया और उत्तर दिया मैं बाप को घर आने देने में उसे मशक (चमड़े की जिसमें पानी भरा- जाता है) की तरह मसल डालूँगा। अब सबसे छोटा लड़का आया उसने भी मैं से पूछा क्या हो गया। उत्तर पाकर कहा मैं तेरी और पिताजी की लड़ाई है मैं क्या जानूँ मुझे भूख लगी है रोटी दे। पिता ने कोठरी से निकलकर बच्चे को उठा लिया और प्यार करता हुआ बोला देखो बस यही मेरा बेटा है। देवी तुम ध्यान करो जिस मास में सबसे पहला गर्भ स्थित हुआ था, क्या उस महीने ऋतु स्नान के पश्चात् किसी कसाई को देखा था? हाँ, कुछ ध्यान पड़ता है नाथ! जब मैं स्नान करके चुकी थी उसी समय किसी ने आपको पुकारा मैंने जाकर देखा कि एक कसाई सामने खड़ा है। बस देवी! यही कारण है कि बड़े लड़के में कुछ कसाई की-सी निर्दयता का आभास होता है।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri