गीता-संग्रह (२५ प्राचीन गीताएँ)
Gita Sangraha 25 Gitas
by महर्षि वेदव्यास / भगवान दत्तात्रेय आदि
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Read in contextभगवतीगीता
[ ‘भगवतीगीता’ देवीपुराण नामक उपपुराणके अन्तर्गत समाहित है। उपपुराण होते हुए भी देवीके भक्तोंमें चिरकालसे देवीपुराणका बहुत प्रचार रहा है, सम्भवतः इसी कारण इसका एक नाम ‘महाभागवत’ भी है। उल्लेखनीय है कि उक्त देवीपुराण प्रसिद्ध देवीभागवतमहापुराणसे सर्वथा भिन्न एक ग्रन्थ है। देवीपुराणके अध्याय १५ से १९ तक कुल ५ अध्यायोंमें श्रीभगवतीगीता विस्तृत है। इसे ‘पार्वतीगीता’ भी कहा जाता है। पार्वतीजीने अपने पिता गिरिराज हिमालयके प्रति ब्रह्मविद्याका उपदेश किया है, जिसे जाननेमात्रसे प्राणी ब्रह्मस्वरूप हो जाता है। जो मनुष्य इसका पाठ करता है, उसके लिये मुक्ति सुलभ हो जाती है। अत्यन्त सहज तथा सुबोध भाषामें निबद्ध यह गीता यहाँ सानुवाद प्रस्तुत है— ]
पहला अध्याय
आद्यशक्तिका ‘पार्वती’ नामसे हिमालयके यहाँ प्राकट्य और दिव्य विज्ञानयोगका उपदेश
नारद उवाच
ब्रूहि देव महेशान यथा सा परमेश्वरी।
बभूव मेनकागर्भे पूर्णभावेन पार्वती॥ १॥
**नारदजी बोले—**महादेव! परमेश्वरी सती जिस प्रकार अपने पूर्णावतारमें पार्वतीरूपसे मेनकाके गर्भमें आयीं, उस कथाको कृपापूर्वक बतायें॥ १॥
श्रुतं बहुपुराणेषु ज्ञायतेऽपि च यद्यपि।
जन्मकर्मादिकं तस्यास्तथापि परमेश्वर॥ २॥