दशकुमारचरितम् (सटीक - पूर्वपीठिका व मूल कथा)
Dashakumaracharitam (with Commentary – Purvapithika and Main Story)
महाकवि दण्डी द्वारा
स्रोत: दशकुमारचरितम् (सटीक - पूर्वपीठिका व मूल कथा) · चौखम्बा संस्कृत सीरीज · 1968 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४५८ दशकुमारचरितम्। [उत्तरपीठिकायां
कर्मसु स्थापयन्, अभिसमाहरेयमर्थानर्थमूला हि दण्डविशिष्टकर्मा
रम्भा न चान्यदस्ति पापिष्ठं तत्र दौर्बल्यात्, इत्याकलय्य योगानन्वतिष्ठम्।
इति श्रीदण्डिनः कृतौ दशकुमारचरिते विश्रुतचरितं
नामाष्टम उच्छ्वासः।
परं पापिष्ठं पापं दोषो वा नास्तीति आकलय्य विचार्य। योगान् नानाविधो-
पायान्। अन्वतिष्ठम् आचरम्।
इति श्रीताराचरणभट्टाचार्यकृतायां बालबोधिनीसमाख्यायां
दशकुमारचरितव्याख्यायामष्टम उच्छ्वासः।
सम्बन्धी सभी कार्य सफल नहीं होते हैं। दुर्बलत्व से अधिक बड़ा कोई पाप नहीं है ऐसा
सोचकर हम शक्ति बढ़ाने की युक्ति करने लगे।
इस प्रकार से दशकुमारचरित के अष्टमोच्छ्वास की
बालक्रीड़ा नामक हिन्दी टीका समाप्त हुई।