चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
by महर्षि चरक व अग्निवेश
Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (origin)
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यदि एक ही पुरुष में वमन आदि कार्यों की प्रवृत्ति (देने) और निवृत्ति
(न देने) दोनों कार्यों के लक्षण हों तब रोगों में गुरुता और लघुता भली
प्रकार देख कर एक कार्य का निश्चय करना चाहिये, प्रवृत्ति और निवृत्ति के
लक्षणों में से जिसके लक्षण गुरु हों वह कार्य करना चाहिये। दूसरे लघु-लक्षणों
वाले कार्य को छोड़ देना चाहिये। क्योकि शास्त्रों में ऐसे भी रोग हैं, जिनकी
चिकित्सा विधि और निषेध रूप से कही है। शास्त्र में उपक्रम की प्रवृत्ति और
निवृत्ति दोनों ही कही है। इनमें से एक कार्य का निश्चय गुरु, लघु देखकर
करना चाहिये ॥१३२॥
यानि तु खलु वमनादिषु भेषज-द्रव्याण्युपयोगं गच्छन्ति तान्यनु-
व्याख्यास्यन्ते । तद्यथा- फल-जीमूतकेक्ष्वाकु - धामार्गव-कुटज-कृतवेधन-
फलानि, फल-जीमूतकेक्ष्वाकु-धामार्गव-पत्र-पुष्पाणि, आरग्वधवृक्षक-
मदन-स्वादुकण्टक-पाठा-पाटला-शाङ्गेष्टामूर्वा-सप्तपर्ण-नक्तमाल-पिचु-
मर्द-पटोल-सुषवी - गुडूची-चित्रक-सोमवल्क द्वीपि-शिग्रु-मूल-कषायैश्च,
मधुक-मधूक-कोविदार-कर्बुदार-नीप-निचुल-बिम्बी-शणपुष्पी-सदापुष्पी-
प्रत्यकपुष्पी-कषायैश्च, एला-हरेणु-प्रियंगु-पृथ्वीका-कुस्तुम्बुरु-तगर-नलद-
ह्रीवेर-तालीश-गोपी-कषायैश्च, इक्षुकाण्डद्वयेक्षुवालिका-दर्भ-पोटगलका-
लंकृत-कषायैश्च, सुमना-सौमनस्यायनी-हरिद्रा-दारुहरिद्रा-वृश्चीर-पुनर्नवा-
महासहा-क्षुद्रसहा-कषायैश्च, शाल्मलि-शाल्मलिक-भद्रपर्ण्यैलापर्ण्युपोदि-
कोद्दालक-धन्वन-राजादनोपचित्रा-गोपी-शृङ्गाटिका-कषायैश्च, पिप्पली-
पिप्पलीमूल-चव्य-चित्रक-शृङ्गवेर-सर्षप-फाणित-क्षीर-क्षार-लवणोदकैश्च
यथालाभं यथेष्टं वाऽप्युपसंस्कृत्य वर्तिक्रियाचूर्णावलेह-स्नेह कषाय-मांस-
रस-यवागू-यूष-काम्बलिक-क्षीरोपधेयान्मोदकानन्यांश्च योगान् विवि-
धाननुविधाय यथा वमनार्हाय दद्याद्विधिवद्वमनमिति कल्पसंग्रहो
वमनद्रव्याणाम्। कल्पस्त्वेषां विस्तरेणोत्तरकालमुपदेक्ष्यते ॥ १३३ ॥
वमनोपयोगी द्रव्यः—वमन आदि कार्यों में जो औषध द्रव्य काम में आते
हैं उनका वर्णन करते हैं। जैसे-वमन द्रव्य फल (मदन फल) जीमूत (तुरई)
इक्ष्वाकु (कड़वी तुरई), धामार्गव (कोषातकी), कुटज (कुड़ा), कृतवेधन
(तुरई) इनके फल लेने चाहियें। फल, जीमूत, ईक्ष्वाकु, धामार्गव इनके पत्ते
और फूल। अमलतास, कुड़ा मैनफल, विकङ्कत, पाठा, पाटला, गुञ्जा, मूर्वा,
सतवन, नाटाकरञ्ज, नीम, परबल, करेला, गिलोय, चीता, खैर, शतावरी,
कंटेरी (छोटी), शोभाञ्जन इनकी जड़ों का कषाय बना कर देवे। महुवा,