बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
DevanagariHindipublished760 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| वर्णक्रमेण दण्डलक्षणम् | २८५ | ७७. गन्धयुक्त्यध्यायः | |
| दण्डादेः समपर्वणः फलम् | २८५ | गन्धयुक्तिद्रव्यनामज्ञानार्थं | |
| दण्डादेः विषमपर्वणः फलम् | २८६ | निघण्टुकथनम् | ३०८ |
| ७३. छत्रलक्षणाध्यायः | गन्धयुक्तिप्रयोजनकथनम् | ३१० | |
| छत्रस्य प्रयोजनकथनम् | २८७ | केशरञ्जनप्रयोगः | ३१० |
| युवराजादेश्छत्रदण्डप्रमाणम् | २८८ | शिरःस्नानप्रकारः | ३११ |
| अन्यराजपुरुषाणां छत्रलक्षणम् | २८८ | सुगन्धतैलनिर्माणप्रकारः | ३१२ |
| सामान्यपुरुषाणां छत्रलक्षणम् | २८८ | गन्धचतुष्टयनिर्माणप्रकारः | ३१२ |
| ७४. स्त्रीप्रशंसाध्यायः | धूपनिर्माणप्रकारः | ३१३ | |
| स्त्रीप्रशंसाध्यायप्रयोजनप्रदर्शनम् | २९० | पुटवासनिर्माणप्रकारः | ३१४ |
| स्त्रीप्रशंसा | २९० | गन्धार्णवनिर्माणप्रकारः | ३१५ |
| मन्वादिकथितस्त्रीप्रशंसा | २९२ | धूपानां बोधनप्रकारः | ३१६ |
| परस्त्रीगमने प्रायश्चित्तकथनम् | २९४ | गन्धद्रव्याणां संख्या | ३१६ |
| अन्यदपि स्त्रीप्रशंसाकथनम् | २९४ | एकैकद्रव्यस्य षड्गन्धकारकत्वम् | ३१७ |
| ग्रन्थकारकृतस्त्रीप्रशंसा | २९५ | सर्वेषां गन्धद्रव्याणां संख्या | ३१७ |
| ७५. सौभाग्यकरणाध्यायः | चतुर्विकल्पेन संख्याज्ञानम् | ३१७ | |
| सुभगपुरुषस्य वैशिष्ट्यम् | २९८ | सर्वगन्धानां संख्याप्रमाणज्ञानम् | ३१८ |
| पुरुषस्य स्त्रिया उत्पत्तिकथनम् | २९८ | भेदसङ्ख्यानयनार्थं लोष्टकप्रस्तारः | ३१८ |
| दूरस्थितेऽपि कामोत्पत्तिकारणम् | २९९ | अन्यगन्धयोगाः | ३२० |
| सुभगदुर्भगलक्षणम् | ३०० | गन्धद्रव्यचक्रे न्यासप्रयोजनम् | ३२१ |
| सौभाग्यप्रशंसा | ३०० | पारिजातमुखवासनिर्माणप्रकारः | ३२१ |
| सर्वप्रियत्वे हेतुः | ३०१ | स्नानीयचूर्णनिर्माणप्रकारः | ३२२ |
| उपकारफलम् | ३०१ | चतुरशीतिकेसरगन्धनिर्माणप्रकारः | ३२२ |
| दुर्जनं प्रति कथनम् | ३०२ | दन्तकाष्ठनिर्माणप्रकारः | ३२३ |
| ७६. कान्दर्पिकाध्यायः | विहितदन्तकाष्ठसेवनस्य गुणाः | ३२४ | |
| कान्दर्पिकाध्यायप्रयोजनप्रदर्शनम् | ३०३ | ताम्बूलगुणाः | ३२४ |
| कामस्य बन्धनरज्जुः | ३०३ | अहोरात्रे पानभक्षणनियमाः | ३२५ |
| शुक्रवृद्धियोगः | ३०३ | ७८. स्त्रीपुंससमायोगाध्यायः | |
| जठराग्निदीपकयोगः | ३०६ | अध्यायारम्भे प्रयोजनकथनम् | ३२६ |
| शुक्रहानियोगः | ६०७ | अनुरक्तायाः लक्षणम् | ३२७ |
| विरक्तायाः लक्षणम् | ३२९ | ||
| स्त्रीणां दूतयः | ३२९ |
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