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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 636 of 737

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Page 636

( २५२ )
अंशक शेषेण युता स्त्रित्प्ता शेषात्र तदंतरादथवा ।
भानोर्ज्ञदिने द्युगुणं यः कथयति कुटकज्ञः सः ॥ ५५ ॥
अंशक शेष त्रियुतं लिप्ता शेषं कदा रवेर्ज्ञ दिने षट् ।
सप्ताष्टोन वा कुर्वन्नावत्सराद्गणकः ॥ ५६ ॥
अंशसम मंशके कलासमं वा कला कदा शेषम् ।
दिवसकरस्येष्ट दिने कुर्वन्नावत्सराद्गणकः ॥ ५७ ॥

५५. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ५६ है)
१. लिप्ता (ग) (च) for (स्त्रिप्ता) ३. द्युगणं (च) (ङ) for (द्युगुणं)
२. शेषात्तदंतरा (ग) (च) for (शेषात्रतदंतरा)
४. कुट्टकज्ञ (ग) कुट्टकज्ञः for (कुटकज्ञः)
(ग) ५. हता for (युता) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ५५ है)
(च) ४. कुदफ्ज्ञः for (कुटकज्ञः) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ५६ अंकित है)
(ङ) ५. युतात् for (युता) लिप्ता for (स्त्रिप्ता)
२. शेषात् for (शेषात्र)
५६. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ५७ है) १. नं वा (ग) नावां for (नवा)
(ग) २. शेषं (ङ) for (शेष)
३. 'षट्' दूसरी पंक्ति का प्रथम पद है (ङ)
४. सप्ताष्टौ for (सप्ताष्टो)
(वि०—इसकी श्लोकसंख्या ५६ है)
(च) १. सप्ताष्टोनं for (सप्ताष्टोन)
५. (वि०—इसकी क्रमसंख्या ५७ अंकित है)
(ङ) १. नव वा for (न वा) ४. सप्ताष्टौ for (सप्ताष्टो)
५७. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ५८ है)
१. मंशशकज्ञा for (मंशके) २. कदा (ग) for (कला)
६. कला (ग) for (कदा) ४. दिवसस्येष्ट for (दिवसकरस्येष्ट)
५. त्सराद्गणकः for (त्सराद्गणकः)
(ग) ६. अंशयुगमंशशेषं for (अंशसममंशके) ७. कलासमांश for (कलासमं)
(वि०—इसकी क्रमसंख्या ५८ है, संख्या ५७ अंकित करना भूल गया)
(च) १. मंशशे for (मंशके) २. ३. कदा कलाशेषं for (कलाकदाशेषम्)
४. दिवसस्येष्ट दिने for (दिवसकरस्येष्ट दिने)
५. स्वराद्गणकः for (सराद्गणकः)
(ङ) १. मंशशेषं for (मंशके) ३. 'कदा' लुप्त