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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 635 of 737

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Page 635

( २५१ )
गत⁵भगणयुता द्युगुणा¹ तद्²द्वेष्युता³ तदैवययुताद्वा⁶ ।
तद्योगाद्वा द्युगुणो यः कथयति कुट्टकज्ञः सः ॥ ५३ ॥ ⁸
गतभगणोना द्युना¹ गणातच्छेषो² ना तदैवयहीनाद्वा⁵ ।
तद्विवराद्वा⁴ द्विगुणं⁶ यः कथयति कुट्टकज्ञः सः ॥ ५४ ॥ ⁷

५३. (घ) १. गणात्त (ग) द्युगुणात् for (द्युगुणा)
२. छेष (ग) for (तद्द्वेष)      २. तदैक्य (ग) for (तदैवय)
४. गणां for (गुणो)
(वि०—इसकी क्रमसंख्या ५४ लिखी है)
५. गतभंगयुतात् for (गतभगणयुता)
६. संयुक्तात् (ङ) for (युताद्वा) ७. तद्योगाद्द्युगुणं for (तद्योगाद्वाद्युगुणो)
८.